जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी नक्सल की काली छाया के लिए जाना जाता था, आज ‘हरित क्रांति’ का नया अध्याय लिख रहा है! यह इलाका अब फल, फूल और मसालों के उत्पादन का पावरहाउस बन चुका है, जिसने पिछड़ेपन की धारणा को पूरी तरह बदल दिया है.

कृषि में 360° का चमत्कारिक बदलाव

​बस्तर की मिट्टी ने साबित कर दिया है कि मेहनत और आधुनिक तकनीक से हर बाधा पार की जा सकती है. जहाँ 2001-02 में सब्जियों की खेती कुछ ही हेक्टेयर में सिमटी थी, वहीं आज,
​सब्जी उत्पादन में दस गुना से अधिक की वृद्धि! (18 हज़ार मीट्रिक टन से बढ़कर 1.9 लाख मीट्रिक टन). ​फलों की बगिया 643 हेक्टेयर से बढ़कर 14,420 हेक्टेयर तक फैली!
​शून्य से शुरुआत करते हुए, आज 207 हेक्टेयर में फूलों की सुगंध बिखर रही है.

हाई-टेक खेती से नई पहचान

​बस्तर के किसान अब मौसम की मार से नहीं डरते, क्योंकि उन्होंने आधुनिकता को अपना लिया है. ड्रैगन फ्रूट की लालिमा, अमरूद की मिठास और कॉफी की सुगंध ने बस्तर को एक नई पहचान दी है. ​3 लाख 80 हज़ार वर्गमीटर में विशाल शेडनेट हाउस और पॉली हाउस बनाए गए हैं, जहाँ उच्च गुणवत्ता वाली फसलें सुरक्षित रूप से उग रही हैं.

बीज उत्पादन से आत्मनिर्भरता : 56 किसान शेडनेट के नीचे हाईब्रिड बीज तैयार करके बस्तर को बीज उत्पादन का केंद्र बना रहे हैं.

जल संरक्षण : लगभग 3,536 हेक्टेयर में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम बिछाकर पानी की हर बूँद का सदुपयोग किया जा रहा है.

​यह केवल आँकड़े नहीं, यह किसानों की मुस्कान है!

​यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों किसानों के सपनों की जीत है, जिन्होंने सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अपने जीवन को बेहतर बनाया है.

​आज, बस्तर में माओवादियों की बंदूकें खामोश हैं, और उनके स्थान पर खेतों में नई फसलें गुनगुना रही हैं. बस्तर के लोग अब खुशहाली, अच्छी आजीविका और बेहतर जीवन जी रहे हैं!

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