जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सा संस्थानों में व्याप्त अनियमितताओं पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है. कलेक्टर हरीश एस. के सीधे निर्देश पर, बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के चल रहे दो संस्थानों को तत्काल सील कर दिया गया है, जबकि एक अन्य पर भारी जुर्माना लगाया गया है. यह कार्रवाई ‘नर्सिंग होम एक्ट’ और ‘छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम’ के तहत की गई है, जिससे पूरे जिले के निजी स्वास्थ्य सेवाओं में हड़कंप मच गया है.

कार्रवाई की मुख्य बातें :
डॉ. मोहनराव क्लिनिक (कुम्हारपारा) सील : अधिनियम का उल्लंघन करने पर क्लीनिक को तत्काल सील किया गया और ₹50,000 का भारी जुर्माना लगाया गया.
बालाजी डायग्नोस्टिक लैब सील : पूर्व में लगाए गए ₹20,000 के जुर्माने का भुगतान न करने पर इस लैब को भी सील कर दिया गया है.
शिव शक्ति मेडिकल स्टोर्स से जुड़े क्लिनिक पर जुर्माना : लालबाग में संचालित इस संस्थान पर अधिनियम का पालन न करने पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उदाहरण बताते हुए कहा, “यह जिले के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश है कि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ ऐसी औचक और कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी.”
जनता से अपील
जिला प्रशासन ने बस्तर की जनता से अपील की है कि वे उपचार के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत संस्थानों का ही चयन करें और किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल प्रशासन को दें. प्रशासन की इस सख्त मुहिम को स्थानीय नागरिकों ने ‘मरीजों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम’ बताते हुए सराहा है.
प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, भविष्य में व्यापक स्तर पर निरीक्षण और इससे भी सख्त कार्रवाइयां की जाएंगी.