जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और विकास पर विश्वास जताते हुए आज बस्तर में एक ऐतिहासिक घटना हुई, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण किया. राज्य के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है.

​जगदलपुर में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दिन को बस्तर, छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि यह गांधी जी के अहिंसा के विचार और सरकार की बेहतर पुनर्वास नीति का सकारात्मक परिणाम है.

पुनर्वास नीति की सफलता

​मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बनी राज्य की नई पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसी के कारण माओवाद का रास्ता छोड़कर लोग विकास की धारा से जुड़ रहे हैं.

आर्थिक सहायता : आत्मसमर्पित कैडरों को 3 वर्ष तक आर्थिक सहायता दी जाएगी ताकि उनका जीवन अभाव रहित हो सके.

विशेष प्रावधान : आवास और नई उद्योग नीति में उनके उज्जवल भविष्य के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं.

विकास की बयार : सीएम ने बताया कि नक्सलवाद से अछूते क्षेत्रों में नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं के तहत सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है.

उपमुख्यमंत्री का बड़ा दावा

​उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर को बस्तर के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल का परिणाम है.

​उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री का 31 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे का संकल्प पूरा हो रहा है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में माड़ डिवीजन की पूरी कमेटी, गढ़चिरौली की कमेटी, कंपनी वन, कंपनी दस, संचार टीम, प्रेस टीम और डॉक्टर टीम शामिल हैं, जिससे अब उत्तर पश्चिम क्षेत्र पूरी तरह क्लियर हो चुका है.

​उन्होंने आगे कहा कि बस्तर की जनता के मनोभाव के अनुरूप ये लोग वापस लौटे हैं और जल्द ही और भी लोग आत्मसमर्पण करेंगे. इस अवसर पर आत्मसमर्पित माओवादियों का स्वागत सामाजिक प्रमुखों (मांझी, चालकी, गायता और पुजारियों) ने किया.

​प्रेस वार्ता में उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित बस्तर क्षेत्र के सभी प्रमुख जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

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