जगदलपुर (डेस्क) – देश की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में आज एक अभूतपूर्व दिन दर्ज हुआ. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में 210 नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियारों के साथ सुरक्षाबलों के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है और भारत के संविधान को थाम लिया है. इस सामूहिक आत्मसमर्पण को देश में नक्सलवाद पर अब तक का सबसे बड़ा निर्णायक प्रहार माना जा रहा है, क्योंकि न केवल बड़ी संख्या में नक्सली लौटे हैं, बल्कि उनके आधुनिक हथियारों का जखीरा भी अब सुरक्षाबलों के कब्जे में है.
विशेष स्वागत
आत्मसमर्पण की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान, स्थानीय मांझी चालकियों ने एक मानवीय और भावनात्मक कदम उठाया. उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को गुलाब फूल भेंट कर मुख्यधारा में उनका स्वागत किया. यह कदम यह दर्शाता है कि स्थानीय समुदाय भी इन लोगों की वापसी को स्वीकार कर रहा है और शांति एवं सुलह की दिशा में एक नया अध्याय शुरू करने को उत्सुक है.
आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल प्रमुख चेहरे
इस दल में केवल सामान्य कैडर के नक्सली ही नहीं, बल्कि नक्सली संगठन के कई बड़े और खूंखार लीडर्स भी शामिल हैं, जो इस आंदोलन की कमर तोड़ने जैसा है:
रूपेश : सेंट्रल कमिटी मेंबर
रनिता : माड़ डिविजन सेक्रेटरी
राजू सलाम, रतन, दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) और माड़ डिविजन के अन्य प्रमुख नेता.
डेटा और महत्व
संगठनात्मक झटका : आत्मसमर्पण करने वालों में माड़ डिवीजन के हथियारबंद नक्सली और दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) के नक्सली शामिल हैं.
बढ़ती प्रवृत्ति : बीते दो सालों में छत्तीसगढ़ में 2100 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जो बताता है कि सुरक्षाबलों का दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति अब निर्णायक परिणाम दे रही है.
राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर कदम : केंद्र सरकार के 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के डेडलाइन की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है.
नए बस्तर की नींव
आत्मसमर्पित नक्सली अब सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेते हुए, जिस बस्तर को वे कभी ‘लाल आतंक’ का केंद्र मानते थे, उसी के शांति और विकास में अपना योगदान देंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद, छत्तीसगढ़ बस्तर में नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है और जल्द ही यह क्षेत्र पूरी तरह से शांति और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ेगा.