जगदलपुर (डेस्क) – शहर के दिल, पुराने तहसील कार्यालय (दशहरा पसरा) में शनिवार रात हुई करन बघेल की वीभत्स हत्या ने पूरे जगदलपुर को सकते में डाल दिया था. जमीन पर खून के गहरे छींटे एक भीषण संघर्ष की कहानी कह रहे थे, और हत्यारा, मानो हवा में गायब हो गया था. लेकिन बस्तर पुलिस ने महज़ 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा कर, हत्या के पीछे के सनसनीखेज मोटिव से पर्दा हटा दिया है. यह निर्मम कत्ल लूटपाट या पुरानी दुश्मनी का नहीं, बल्कि एक महिला से हुई अभद्रता का खूनी प्रतिशोध था.

सुलझी मर्डर मिस्ट्री : अभद्र टिप्पणी बनी मौत की वजह

​कोतवाली थाना पुलिस द्वारा गठित विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राहुल यादव और तीन विधि से संघर्षरत बालकों (नाबालिगों) को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के सामने हुए खुलासे के अनुसार, खूनी वारदात की शुरुआत इस विवाद से हुई.

रात 10 बजे का विवाद : वारदात की रात करीब 10:00 बजे, मृतक करन बघेल दशहरा पसरा के पास लगे एक अंडा ठेला पर गया. माचिस मांगने पर ठेला संचालिका (जो राहुल यादव की बहन है) ने मना किया, तो करन ने महिला पर अभद्र टिप्पणी कर दी.

भाई का गुस्सा : महिला के भाई, आरोपी राहुल यादव, ने यह देखकर करन को तीन-चार झापड़ मारे और वहां से भगा दिया.

बुलाकर लिया इंतकाम : अपमानित राहुल ने तुरंत अपने तीन नाबालिग साथियों को फोन कर बुलाया और उन्हें बताया कि करन ने उसकी बहन के साथ बदतमीजी की है.

खूनी संघर्ष : चारों आरोपियों ने मिलकर करन बघेल को दशहरा पसरा के अंदर घेर लिया. विवाद मारपीट में बदला और इसी दौरान एक नाबालिग ने पास रखे धारदार चाकू से करन की जांघ पर जानलेवा वार कर दिया.

मौत का सन्नाटा : चाकू लगने के बाद करन ने डंडा उठाकर उनका पीछा किया, जिस पर तीनों हमलावर भाग निकले. लेकिन गंभीर रूप से घायल करन पसरा के गेट पर कुछ देर खड़े रहने के बाद वापस घटनास्थल पर गिरा और वहीं उसकी मौत हो गई.

क्रूरता के पीछे का सच : चाकू और डंडे से हमला

​पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त चाकू, लकड़ी का डंडा और उनकी मोटर सायकल जब्त की है. करन बघेल के शरीर पर मिले धारदार हथियार और लाठी-डंडों के निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह एक साधारण हमला नहीं, बल्कि बेहद क्रूरता से अंजाम दिया गया कत्ल था, जिसका कारण एक क्षणिक विवाद और उस पर हुआ सामूहिक प्रतिशोध था.

​पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने पूरे शहर में भय और जिज्ञासा के माहौल को शांत किया है और 24 घंटे के भीतर ‘हवा में घुले’ हत्यारों का पर्दाफाश कर दिया है.

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