सुकमा (नवीन कश्यप) – नक्सल प्रभावित दोरनापाल क्षेत्र का प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही के कारण खुद बीमार नजर आ रहा है. सोमवार को अस्पताल में ऐसी स्थिति देखने को मिली, जब सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज को इलाज के लिए लाया गया, लेकिन अस्पताल में एक भी वार्ड बॉय मौजूद नहीं था.
परिजनों ने खुद किया संघर्ष
तेमलवाड़ा घाट में हुए सड़क हादसे के एक घायल मरीज को जब दोरनापाल अस्पताल लाया गया, तो यहाँ की सच्चाई सामने आ गई. मरीज को स्ट्रेचर से वार्ड तक पहुंचाने और प्राथमिक उपचार के लिए ड्रेसिंग कराने तक परिजन और आसपास के लोग खुद ही संघर्ष करते रहे. मरीज के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि अस्पताल में लाने के बाद करीब आधे घंटे तक कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं आया. थक-हारकर परिजनों और कुछ स्थानीय लोगों ने मजबूरन खुद ही मरीज को वार्ड तक पहुंचाया. घटना के समय अस्पताल में केवल नर्सिंग स्टाफ मौजूद था, लेकिन वार्ड में मरीज को शिफ्ट करने और प्राथमिक देखभाल के लिए आवश्यक सहयोगी कर्मचारी (वार्ड बॉय) पूरी तरह नदारद थे.
प्रभारी बोले : ‘सभी वार्ड बॉय छुट्टी पर है’
इस गंभीर स्थिति पर अस्पताल प्रभारी डॉ. चित्रांगदा चंद्राकर ने एक चौंकाने वाली सफाई दी. उन्होंने कहा कि “सभी वार्ड बॉय छुट्टी पर हैं, जिसके कारण थोड़ी असुविधा हुई.” डॉ. चंद्राकर ने जल्द ही समस्या का समाधान करने और नर्सिंग स्टाफ को आपात स्थिति में देरी न करने का निर्देश देने की बात कही.
सरकारी सिस्टम पर गम्भीर सवाल
हालांकि, प्रभारी का यह बयान स्थानीय लोगों के आक्रोश को शांत नहीं कर सका. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सीधे सवाल किया है कि एक संवेदनशील और दूरदराज़ के इलाके, जहाँ आसपास के दर्जनों गाँवों से लोग इलाज के लिए आते हैं, वहाँ एक साथ सभी वार्ड बॉय को छुट्टी कैसे दे दी गई?

चिंतागुफा से लाए गए एक अन्य मरीज के परिजनों ने भी इसी दिन ऐसी ही अव्यवस्था का सामना किया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह लापरवाही का कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि स्टाफ की कमी और जिम्मेदारी की अनदेखी के कारण मरीजों को लंबे समय से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि यह लापरवाही जारी रही तो किसी भी समय किसी मरीज की जान जा सकती है. उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. दोरनापाल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली सरकारी सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है.