जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर में माओवादी आंदोलन को आज एक बड़ा झटका लगा है. प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की सदस्य सुजाता उर्फ कल्पना ने तेलंगाना में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. यह कदम दण्डकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन के लिए एक गंभीर संकट का संकेत माना जा रहा है.
सुजाता माओवादी संगठन की सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थी. वह दंडकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के दक्षिण उप-ज़ोनल ब्यूरो की प्रभारी थी और उस पर 40 लाख रुपये का इनाम घोषित था. बस्तर रेंज के अलग-अलग ज़िलों में उसके ख़िलाफ़ 72 से ज़्यादा मामले दर्ज थे.
बस्तर पुलिस ने इस आत्मसमर्पण को अपनी आक्रामक माओवादी विरोधी रणनीति की बड़ी सफलता बताया है. पुलिस ने पिछले कुछ समय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, आमसूचना एजेंसियों और अंतर्राज्यीय सीमा पर तैनात सुरक्षा इकाइयों के साथ मिलकर लगातार अभियान चलाए हैं. इन अभियानों ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है और उनके कमांड तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित किया है.
बताया गया कि साल 2025 में, विभिन्न मुठभेड़ों के बाद, 250 से अधिक माओवादियों के शव बरामद किए गए, जिनमें नक्सल संगठन के जनरल सेक्रेटरी बसवा राजू, सेंट्रल कमेटी मेंबर गौतम, और स्टेट कमेटी मेंबर सुधीर, रेणुका और भास्कर राव शामिल थे। यह कार्रवाई DRG, STF, बस्तर फाइटर्स, कोबरा, CRPF, SSB, ITBP और अन्य पुलिस बलों द्वारा की गई थी. इसके अलावा, सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 850 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि सुजाता का आत्मसमर्पण यह दिखाता है कि हमारी बहुआयामी रणनीति काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस के सक्रिय प्रयासों के साथ-साथ सरकार का विकास और कल्याण पर ज़ोर देने से माओवादियों का प्रभाव कम हो रहा है. बस्तर आईजी ने माओवादी संगठन के बाकी कैडर और नेताओं से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं. उन्होंने चेतावनी भी दी कि माओवादियों के पास हिंसा छोड़ने के अलावा अब कोई और रास्ता नहीं बचा है. पुलिस ने यह भी साफ़ कर दिया है कि वे तब तक अभियान जारी रखेंगे, जब तक वामपंथी उग्रवाद का पूरी तरह से खात्मा नहीं हो जाता.
सुजाता के आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के भीतर बढ़ते विश्वास संकट का नतीजा माना जा रहा है. हाल के महीनों में माओवादियों को छत्तीसगढ़ में भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें कई बड़े नेताओं का मारा जाना, बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी और उनके ठिकानों का ध्वस्त होना शामिल है.