जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर जिले में बीते 26 अगस्त को भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने खूब तबाही मचाई थी. इस भयावह बाढ़ से जनहानि के साथ-साथ कई घर और सड़कें भी बह गए थे, जिससे कई गाँवों का संपर्क टूट गया था. लेकिन, मुश्किल की इस घड़ी में भी इंसानियत और सामुदायिक एकता की मिसाल देखने को मिली.

​बस्तर के अल्वा गाँव में, जब बाढ़ से मुख्य सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने खुद ही इस समस्या का हल निकालने का फैसला किया. गाँव के लोग, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक भी शामिल थे, ने मिलकर श्रमदान करने का बीड़ा उठाया.

​उन्होंने पारंपरिक औजारों, जैसे कि गैती और फावड़े, का इस्तेमाल करके क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत शुरू कर दी. करीब 3-4 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद, ग्रामीणों ने सड़क को फिर से आवागमन लायक बना दिया. इस वैकल्पिक व्यवस्था से न सिर्फ गाँव के लोगों का संपर्क फिर से बहाल हुआ, बल्कि स्कूली बच्चों और शिक्षकों को भी स्कूल जाने में मदद मिली.

​यह सड़क नेशनल हाईवे 63 को कई महत्वपूर्ण स्थानों, जैसे डोडरेपाल, डिलमिली, मंडवा जलप्रपात और दरभा मुख्यालय से जोड़ती है. इसके क्षतिग्रस्त होने से इन सभी जगहों पर आने-जाने में भारी परेशानी हो रही थी. ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जब लोग एकजुट होकर काम करते हैं, तो किसी भी मुश्किल का सामना किया जा सकता है. यह कहानी बताती है कि आपदा के समय भी आपसी सहयोग और मेहनत से कैसे एक नई उम्मीद जगाई जा सकती है.

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