सुकमा (डेस्क) – प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन को करारा झटका देते हुए उसकी सबसे वरिष्ठ भूमिगत महिला नेता, केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) और दक्षिण उप-क्षेत्रीय ब्यूरो सचिव पोथुला पद्मावती उर्फ कल्पना उर्फ म्यनाक्का उर्फ सुजाता ने आज शनिवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का दामन थाम लिया.
62 वर्षीय सुजाता जोगुलाम्बा गडवाल जिले के गट्टू मंडल के पेंचिकालपाडु गांव की मूल निवासी हैं. उनका परिवार संपन्न कृषक रहा है, लेकिन 1980 के दशक में वह माओवादी विचारधारा से प्रभावित होकर जंगल का रास्ता पकड़ लीं. इसके बाद उसने चार दशकों से अधिक समय तक दंतेवाड़ा-बस्तर और गढ़चिरौली के जंगलों में रहकर संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाई.
माओवादी संगठन में लंबा सफर
1988-89 में उन्होंने पेरिमिली और एटापल्ली दलम से सक्रिय भूमिका शुरू की और कमांडर के पद तक पहुंचीं. 1996 में देवुरी दलम की कमान संभाली और 1997 के बाद दक्षिण बस्तर में डीवीसीएम और क्षेत्रीय सचिव बनीं. 2001 में उन्हें राज्य समिति सदस्य बनाकर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) में शामिल किया गया.
2007 में माड़ सम्मेलन के बाद उसे डीकेएसजेडसी के सचिवालय सदस्य की जिम्मेदारी दी गई, जहां उसने जनता सरकार और विभिन्न जनसंगठनों को खड़ा किया. 2018 में उन्हें पूरे दंडकारण्य क्षेत्र की जनता सरकार का प्रभारी नियुक्त किया गया. 2022 में वह दक्षिण उप-क्षेत्रीय ब्यूरो की सचिव बनीं और 2023 में केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) के रूप में संगठन की सर्वोच्च समिति में शामिल की गईं.
सुजाता को कोया भाषा की पत्रिका पेथुरी की संपादक के रूप में भी जाना जाता है, जिसे वह वर्ष में तीन बार प्रकाशित करती थीं.
बड़े नक्सली हमलों में शामिल
सुजाता पर बस्तर और गढ़चिरौली में 100 से अधिक बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल रहने का आरोप है.
9 जुलाई 2007 को एर्राबोर में हमले में 23 जवान शहीद हुए.
6 अप्रैल 2010 को ताड़मेटला में 76 जवान शहीद हुए.
17 मई 2013 को दंतेवाड़ा में बस धमाके में 36 लोगों की मौत हुई.
25 मई 2013 को झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित 32 लोग शहीद हुए.
24 अप्रैल 2017 को सुकमा में 25 जवान शहीद हुए.
21 मार्च 2020 को सुकमा में 17 जवान शहीद हुए.
3 अप्रैल 2021 को बीजापुर के टेकलगुड़ेम में 21 जवान शहीद हुए और एक जवान अगवा किया गया.
इन घटनाओं ने देश को झकझोर दिया था और सुजाता को बस्तर के सबसे खतरनाक माओवादी चेहरों में गिना जाने लगा.
आत्मसमर्पण की वजह
मई 2025 में बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण सुजाता ने संगठन छोड़ने का मन बनाया और औपचारिक रूप से केंद्रीय समिति को त्यागपत्र भेजा. उसने सामान्य जीवन जीने, परिवार के साथ रहने और सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ लेने की इच्छा जताई.
पुनर्वास और सरकारी रुख
सुजाता पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसे तेलंगाना पुलिस ने डिमांड ड्राफ्ट के रूप में सौंप दिया है. साथ ही, उन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत अन्य लाभ भी मिलेंगे.
तेलंगाना पुलिस ने कहा कि अकेले 2025 में ही 404 भूमिगत नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं. वर्तमान में 78 भूमिगत नक्सली तेलंगाना के मूल निवासी हैं.
डीजीपी तेलंगाना ने अपील की है – “हथियार डाल दो और मुख्यधारा से जुड़ो. अपने गांव लौट आओ और राज्य की उन्नति में भागीदार बनो.”