सुकमा (डेस्क) – जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था ठप हो गई है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी पिछले 22 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. ये वही कर्मचारी हैं जिन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक दवाइयाँ और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाईं, लेकिन आज वे खुद अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इनकी मुख्य मांग है नियमितीकरण.
रोजी-रोटी का नया तरीका : ‘NHM नाश्ता स्टॉल’
आज सुकमा का बाज़ार एक अनोखे नजारे का गवाह बना. मरीजों की सेवा करने वाले ये स्वास्थ्यकर्मी, सफेद कोट की जगह अब एक ‘NHM नाश्ता स्टॉल’ लगाकर चाय, दहीवड़ा और भजिया बेच रहे हैं. यह स्टॉल सिर्फ खाने-पीने का ठिकाना नहीं है, बल्कि उनकी मजबूरी, दर्द और सरकार के प्रति आक्रोश का प्रतीक बन गया है. स्टॉल पर आए कई लोगों ने जब इनकी आँखों में दर्द देखा, तो वे भी भावुक हो गए.

इस आंदोलन को सर्व आदिवासी समाज और कोया समाज जैसे स्थानीय संगठनों का भी समर्थन मिला है, जिससे कर्मचारियों का हौसला बढ़ा है.
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
कर्मचारी संघ का कहना है कि उन्होंने पिछले 20 महीनों में सरकार को 160 से अधिक ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल “टीम गठन” का झूठा आश्वासन देकर टाल दिया गया. कर्मचारी अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश चाहते हैं. उनका कहना है कि “मोदी जी की गारंटी भी अधूरी रह गई. वादाखिलाफी अब और नहीं चलेगी.”

स्वास्थ्य सेवाएं ठप, ग्रामीण बेहाल
इस हड़ताल का सीधा असर सुकमा जैसे संवेदनशील जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है. गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे इलाज से वंचित हो रहे हैं. जिन दूरदराज के गाँवों में ये कर्मी हर मौसम में पैदल पहुँचते थे, वहाँ आज सन्नाटा पसरा है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम पूरी तरह से ठप हो चुके हैं और हज़ारों गरीब ग्रामीण अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं.
‘लिखित आदेश तक हड़ताल जारी’
कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश साहू ने साफ चेतावनी दी है, “जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होगा, हड़ताल खत्म नहीं होगी. ज़रूरत पड़ी तो हम भूख हड़ताल और आमरण अनशन का रास्ता भी अपनाएँगे.” उपाध्यक्ष रीना नायडू और प्रवक्ता मुकेश बख्शी ने भी यही दोहराया कि अब पीछे हटने का सवाल नहीं है.
इस प्रदर्शन में कोंटा, छिंदगढ़ और सुकमा से बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें नवीन पाठक, डॉ. प्रदीप पटेल, जय नारायण सिंह, डॉ. रंजना पटेल, बसंती, हिमानी सरकार, डॉ. विजय, राजेंद्र पांडेय, जितेंद्र नामदेव, हिमांशु जायसवाल, सरफराज नवाज, शाश्वत सिंह, मंजीत लकड़ा, मनीषा नेताम, भारती नेताम और हर्षा नागवंशी शामिल थे.