सुकमा (डेस्क) – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. शनिवार को यह आंदोलन 20वें दिन भी जारी रहा. सुकमा जिले में कर्मचारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर शासन की वादाखिलाफी और संवेदनहीन रवैये के खिलाफ नारेबाजी की.
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि शासन जानबूझकर यह कह रहा है कि नियमितीकरण राज्य सरकार के हाथ में नहीं है, जबकि 2012 के संयुक्त सचिव के पत्र और हाल ही में प्राप्त आरटीआई जवाब से स्पष्ट है कि राज्य सरकार NHM नियमितीकरण कर सकती है. उनका कहना है कि इससे शासन पर महज 70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा.
संघ ने यह भी साफ किया कि शासन द्वारा पांच मांगें पूरी करने का दावा भ्रामक है, क्योंकि इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. कर्मचारियों ने कहा कि 20 महीनों में 160 आवेदन और दो सांकेतिक हड़तालों के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यहां तक कि 25 नेतृत्वकर्ताओं को बर्खास्त कर दिया गया.
हड़ताल के चलते सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं. कई स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटक गए हैं, राष्ट्रीय कार्यक्रम स्थगित हो गए हैं और ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाएं ठप पड़ी हैं.
जिला अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश साहू, उपाध्यक्ष श्रीमती रीना नायडू और प्रवक्ता डॉ. मुकेश बख्शी ने कहा कि नियमितीकरण, ग्रेड पे, जॉब सिक्योरिटी, अनुकंपा नियुक्ति और लंबित 27% वेतन वृद्धि पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही लिखित आदेश जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा.
धरना-प्रदर्शन में नवीन पाठक, डॉ. प्रदीप पटेल, जय नारायण सिंह, डॉ. रंजना पटेल सहित बड़ी संख्या में सुकमा, कोंटा और छिंदगढ़ के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे.