जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया, जब प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप पर एक सरकारी कर्मचारी से मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप लगा. यह तथाकथित घटना जगदलपुर सर्किट हाउस में हुई, जिसके बाद से प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है.
मारपीट के आरोप और मंत्री का खंडन
जगदलपुर सर्किट हाउस में कार्यरत एक कर्मचारी, जिनका नाम हितेंद्र पांडे बताया जा रहा है और जो लकवाग्रस्त भी हैं, ने मंत्री केदार कश्यप पर यह गंभीर आरोप लगाया है. कर्मचारी का कहना है कि मंत्री ने समय पर कमरे का दरवाजा न खोलने को लेकर उन्हें बुलाया, गालियां दीं, जूता उठाया और कॉलर पकड़कर उनके साथ मारपीट की. इस घटना के बाद से ही कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है.
दूसरी ओर, मंत्री केदार कश्यप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ऐसी कोई घटना घटित ही नही हुई है, यह कांग्रेस द्वारा फैलाया गया “झूठा और भ्रामक प्रचार” है, क्योंकि उनके पास कोई और मुद्दा नहीं बचा है.
विपक्ष का हमला और आंदोलन की तैयारी
इस घटना ने कांग्रेस को सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका दे दिया है. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल मंत्री केदार कश्यप से इस्तीफे की मांग की है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस घटना को शर्मनाक बताते हुए मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की है.
इस मामले को लेकर कांग्रेस सोमवार को मंत्री के बंगले का घेराव करने की तैयारी में है. कांग्रेस ने प्रदेशभर के जिलों में भी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, जिससे यह विवाद सड़कों पर भी देखने को मिल सकता है.
राजनीतिक समीकरणों पर असर
यह मामला अब एक राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है. एक तरफ भाजपा इसे विपक्ष की साजिश बताकर अपने मंत्री का बचाव कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा के “चाल, चरित्र और चेहरे” से जोड़कर आम जनता के बीच ले जा रही है. ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.