जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में बीते दिन आई बाढ़ के बाद राहत पहुंचाने के मामले को लेकर आज सोमवार को नाराजगी जाहिर की है. इसके साथ ही उन्होंने शासन – प्रशासन पर राहत पहुंचाने के नाम पर पीड़ितों के साथ मजाक करने का आरोप लगाया है. वहीं उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की भी मांग सरकार से की है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे बस्तर में पिछले एक हफ्ते में बारिश ने जो कहर बरपाया है. ऐसा मंजर पिछले 100 साल में देखने को नहीं मिला. यह बड़ी त्रासदी है जो बस्तर के लागों को झेलनी पड़ रही है. इस बरसात ने सड़कों, पुल – पुलियों को तबाह किया ही है, आम आदमी की रोजी – रोटी के साधन खेती – बाड़ी सभी बर्बाद हो गये है.

उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति भयावह है लगातार तीन दिनों तक बस्तर दंतेवाड़ा एवं अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हमने सभी जगह की स्थिति देखी, लोग बहुत परेशानी में है, खाना पीना दवाइयां कुछ भी नहीं उनके पास, घरों में रखा कपड़ा, अनाज, नगदी रुपया, बच्चों के कापी किताब सब कुछ बह गया, बर्बाद हो गया. जीवन थम गया है, लोगों के चेहरे में बेबसी लाचारी साफ दिख रही है. हमने अनेकों राहत शिविरों का दौरा कर बाढ़ पीड़ित परिवारों की समस्याएं सुनी और हाल – चाल जाना. उन्होंने कहा कि वह दंतेवाड़ा भी गए थे. उन्होंने बाँगापाल, बड़े तुमनार, दंतेवाड़ा, आवराभाटा, सुरभि कॉलोनी, बालपेट (भैरमबद़) का दौरा किया. उन्होंने बालपेट हाई स्कूल व (भैरमबद़) के राहत शिविर का भी दौरा किया और वहां पीड़ितों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि उन्हें बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि जो राहत सामग्री मिल भी रहा है तो वो नाकाफी है. कुछ को मिला तो कुछ को नहीं. राहत पहुंचाने के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है. जिनका सब कुछ लुट गया उन्हें केवल 3 से 4 हजार की मदद दी जा रही है. राशन के नाम पर 4 – 5 लोगों के परिवार को केवल 100 ग्राम दाल और 3 किलो चावल दिया जा रहा है. खाना बनाने का किचन का सारा समान तो बह गया माचिस की एक तिली भी नहीं है, तो खाना कैसे बनेगा. बगैर बर्तन, गैस, लकड़ी, चूल्हा के ग्रामीणों को खाना बनाने में परेशानी हो रही है. पका हुआ खाना दोपहर 3 बजे तक लोगों तक नहीं मिल रहा. खाना बनवाने वाले अधिकारी कहते हैं कि खाना बना है पर बांटने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है. खाना जहां बनवा रहे वह गांव से तीन किमी दूर है. खाना खाने उतना पैदल चल कर जाना होता है. हेल्थ कैंप की व्यापक व्यवस्था नहीं है. गर्भवती महिलाएं एवं अन्य ग्रामीण इलाज की तरस रहे है. दवाओं और इलाज की कमी से लोग बीमारी से जूझ रहे है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि हमारी मांग है कि बस्तर के हालात को सामान्य होने में समय लगेगा. ऐसे समय में यह आवश्यक है कि सरकार अपनी पूरी क्षमता का उपयोग क्षेत्र के अधोसंरचना के साथ – साथ यहां के आम आदमी की मदद में लगाये. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि बस्तर के बाढ़ प्रभावितों के लिए केंद्र और राज्य दोनों विशेष पैकेज की घोषणा करें. भाजपा डबल इंजन की सरकार का दंभ भरती है. हम मांग करते है राज्य सरकार बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सर्वे के लिए केंद्र सरकार से मांग करें और केंद्र सरकार यहां के लिए विशेष राहत पैकेज दें. उन्होंने आगे कहा कि आज मुख्यमंत्री बस्तर दौरे पर आए है, हम उनसे मांग करते है कि उनका दौरा सिर्फ खानापूर्ति न साबित हो. राहत और मुआवजे की ठोस घोषणाएं की जाएं. उस पर त्वरित अमल भी हो. ऐसे समय जब बस्तर पर संकट था तब प्रदेश के मुखिया विदेश प्रवास पर थे. विदेश से आने के बाद वे रायपुर में ढोल नगाड़े फूल मालाओं से अपना स्वागत करवा रहे थे. मुख्यमंत्री में संवेदनशीलता होती तथा बस्तर के लिए पीड़ा होती तो वे अपना जापान, कोरिया का दौरा बीच में छोड़ कर बस्तर आते, लेकिन वे आज आए है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दोनों उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, राजस्व मंत्री, आपदा प्रबंधन मंत्री कोई भी बस्तर नहीं आया.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बस्तर में भारी बारिश से जनजीवन तबाह हो गया है. अनेक गांवों का संपर्क टूट चुका है. अनेकों रास्ते बंद हो चुके हैं. सैकड़ों लोगों का घर बारिश से टूट चुका है. स्थितियां चिंताजनक है. प्रभावित घरों के निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाएं.

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि टूट चुके मार्गो पुल पुलिया का मरम्मत शुरू कर आवागमन को बहाल किया जाएं. बिजली व्यवस्था तुरंत बहाल किया जाएं. प्रभावितों का व्यवस्थापन सुरक्षित स्थान पर उनकी सहमति से किया जाएं. प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता और 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएं. स्कूली बच्चों को कापी, किताब, बस्ते और स्कूल ड्रेस उपलब्ध करवाया जाएं. स्वास्थ्य सुविधाएं तुरंत बहाल की जाएं. जब तक तात्कालिक राहत राशि 50000 और मुआवजा राशि दस लाख का वितरण नहीं हो जाता सरकार प्रभावित क्षेत्रों में सभी के लिए पका भोजन की व्यवस्था सुचारू रूप से करें.

इस दौरान शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता निषाद, कविता साहू, राष्ट्रीय प्रवक्ता जावेद खान, अजय बिसाई आदि भी मौजूद रहे.

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