बस्तर- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में आजादी के 79 साल बाद नक्सलगढ़ के 29 गांवों ने पहली बार आजादी का महोत्सव मनाया है. सुबह से ही घरों से निकलकर राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए लोग एक जगह इक्कठे हुए. और सुरक्षाबल के जवानों के साथ मिलकर देश का तिरंगा लहराया है. इसके अलावा नक्सलगढ़ में वंदे मातरम की गूंज सुनाई दी.

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि शांति, एकता और विकास के ऐतिहासिक क्षण में सबसे दूरस्थ आंतरिक गांवों तक जो कभी माओवादी गढ़ के रूप में जाने जाते थे. वहां स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन हुआ. कई दशकों बाद उन स्थानों पर तिरंगा शान से लहराया. जहां कभी काले झंडे और भय का माहौल था. स्थानीय जनता प्रशासन और सुरक्षा बलों ने कंधे से कंधा मिलाकर गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

इन उत्सवों ने पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी. वातावरण में देशभक्ति के गीत गूंजे, बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी और बुजुर्गों ने गर्व से इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बने. पूरा समाज स्वतंत्रता की भावना और शांतिपूर्ण भविष्य की नई आशा के साथ एकजुट हुआ.

सुन्दरराज पी. ने कहा कि यह परिवर्तन सरकार के माओवादी हिंसा को समाप्त करने के लिए किए गए लगातार और ठोस प्रयासों का परिणाम है. हाल के महीनों में आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित नए सुरक्षा शिविरों ने न केवल सुरक्षा को मजबूत किया है. बल्कि लोगों में आत्मविश्वास और अपनापन की भावना को भी पुनर्स्थापित किया है. ग्रामीणों और जवानों की सक्रिय भागीदारी की भी सराहनीय है और इसे जनता प्रशासन और सुरक्षाबलों के बीच गहराते विश्वास का सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने कहा यह तथ्य कि अब यहां के लोग खुलेआम और गर्व से अपने देश की आज़ादी का जश्न मना सकते हैं.

शांतिपूर्ण और सुरक्षित समारोह सुनिश्चित करने के लिए डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, कोबरा और सीएपीएफ जैसी विशेष इकाइयों ने पूरे क्षेत्र में लगातार गश्त और प्रभुत्व अभियान चलाया.

बस्तर संभाग के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा…

कोण्डापल्ली, जिडपल्ली, पिडिया, पुजारीकांकेर, कोरचोली, गारपा, कुतूल, नेलांगुर, पंगुर, रायगुड़ेम, गोमगुड़ा और नुलकातोंगग (जिला बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर) जैसे प्रमुख स्थानों पर स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया गया.

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