बस्तर- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में भी आजादी का पर्व धूमधाम से मनाया गया. स्कूली बच्चों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर स्वतंत्रता दिवस में हिस्सा लिया. बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित 29 गांवों में पहली बार लोगों ने आजादी का पर्व मनाया. इसके अलावा अबूझमाड़ इलाके से भी आजादी के पर्व की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली है. जिसमें आदिवासी मासूम बच्चे हाथों में तिरंगा ध्वज लेकर खेतों में दौड़ते और रैल्ली निकालते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर कौरगांव की है. कौरगांव अबूझमाड़ के हिस्से में ही आता है. क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी को पार करना पड़ता है. छिंदनार में पूल निर्माण के बाद आसानी से लोग नदी को पार करते हैं.
बस्तर फाइल्स स्वतंत्रता दिवस के दिन इन क्षेत्रों के दौरे पर था. दौरे के दौरान खेतों पर दौड़ते बच्चों को देखा. और उनसे बातचीत की. बातचीत में बच्चों ने बताया कि 15 अगस्त की सुबह सब तैयार होकर एक जगह इक्कठे हुए. स्कूल परिसर में तिरंगा ध्वज फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया. राष्ट्रगान गाने के बाद जय हिंद के नारे लगाए गए. और गाँव मे रैल्ली निकालकर सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी गई. इसके अलावा ग्रामीणों के साथ मिठाई खाई गई. साथ ही गांव के पंचायत के द्वारा खेलकूद का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था. जिसमें कबड्डी खेली गई.
बता दें कि इस गांव तक सीधे आप मोटरसाइकिल से नहीं पहुंच सकते हैं. पहले आपको मोटरसाइकिल से इंद्रावती नदी पार करने के बाद कुछ दूरी तक पगडंडियों के सहारे मोटरसाइकिल से पहुंचना होता है. जिसके बाद गांव से करीब 1 किलोमीटर पहले ही मोटरसाइकिल को पेड़ो के नीचे छोड़ दिया जाता है. क्योंकि आगे मोटरसाइकिल से सफर करना संभव नहीं है. जिसके बाद पैदल सफर तय करना होता है. इस किलोमीटर के सफर में एक इंद्रावती नदी की सहायक नदी भी मिलती है. जिसे डोंगी से पार करना पड़ता है. यह दोनों नदी काफी खतरनाक है. क्योंकि इस नदी में अक्सर मगरमच्छों की मौजूदगी बनी रहती है. और आये दिन मगरमच्छ नदी के किनारे आराम फरमाते रहते हैं. इन सब चुनौतियों को पार करके कौरगांव तक पहुंचा जाता है.
