सुकमा (डेस्क) – जिले के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित गांव पोटकपल्ली में घटित एक हृदय विदारक घटना ने पूरे अंचल को शोक और सवालों में डुबो दिया है. लगभग तीन सप्ताह पहले, एक तीन वर्षीय मासूम दीरदो चंदू की खुले सोखता गड्ढे में गिरकर मौत हो गई. यह हादसा न सिर्फ एक मां की गोद उजाड़ गया, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और संवेदनहीनता की परतें भी खोल कर रख दीं.

बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल की टीम ने जब मृतक की मां रामे से बातचीत की, तो उसका दर्द शब्दों में पिघलता नजर आया. कांपती आवाज़ और नम आंखों से उसने बताया कि “मैं खेत में काम कर रही थी, चंदू घर के पास आंगन में खेल रहा था. घर के बगल में नल – जल योजना के तहत बना पानी टैंक है, जिसके ठीक पास ही पिछले साल एक सोखता गड्ढा खोदा गया था. लेकिन आज तक उसे ढका नहीं गया. वहीं गड्ढा मेरे बेटे की कब्र बन गया.”

रामे की बातों में आक्रोश भी था और बेबसी भी. पीड़िता का कहना था कि “कई बार सरपंच और सचिव से कहा कि उस गड्ढे को ढक दो, बच्चे खेलते हैं… कभी भी हादसा हो सकता है. लेकिन किसी ने एक न सुनी. अब मेरा बेटा चला गया… क्या अब भी कोई जागेगा ? ”

घर लौटने पर रामे ने जब देखा कि आंगन में उसका लाल निःशब्द पड़ा है, तो उसका रो – रो कर बुरा हाल हो गया. गांववालों ने उसे संभाला, लेकिन उस मां के भीतर जो टूट गया, उसे कोई जोड़ नहीं सकता.

वहीं इस मामले में युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव दुर्गेश राय ने इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवालों की बौछार की. उन्होंने कहा कि “इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी तीन सप्ताह में न कोई अधिकारी आया, न कोई जांच हुई और न ही दोषियों पर कार्रवाई हुई है. क्या एक मासूम की जान की कीमत कुछ भी नहीं है ? ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति तभी रुकेगी जब जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाएगा.”

उन्होंने शासन से मांग की है कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो. साथ ही गांव में अन्य ऐसे खुले गड्ढों की जांच कर उन्हें सुरक्षित किया जाए.

इस हृदय विदारक घटना के बाद पोटकपल्ली गांव में सन्नाटा पसरा है. हर आंख नम है और हर जुबां पर यही सवाल कि “अगर पहले ही सावधानी बरती जाती, तो क्या चंदू आज हमारे बीच होता ?”

एक मासूम की मौत ने कई जिंदगियों को झकझोर दिया है. अब जरूरत है सिर्फ संवेदना की नहीं, कार्रवाई की. ताकि अगला चंदू किसी और मां की गोद से न छिन जाए.

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