जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में माओवादी संगठन को उस समय बड़ा झटका लगा जब सीपीआई (माओवादी) के दो शीर्षस्थ नेता माला संजीव उर्फ लेंगु दादा और उसकी पत्नी पेरुगुला पार्वती उर्फ दीना ने राचकोंडा पुलिस आयुक्त के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. दोनों ने चार दशक से अधिक समय तक माओवादी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई थी.
बताया गया कि 62 वर्षीय माला संजीव, दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (DKSZC) के सचिवालय सदस्य और जन नाट्य मंडली (JNM) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. वहीं, उसकी पत्नी दीना, 50 वर्ष की हैं और राज्य समिति सदस्य के पद पर कार्यरत रही हैं. दोनों ने चैतन्य नाट्य मंच के माध्यम से माओवादी विचारधारा का प्रचार करने के लिए वर्षों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया था.
माला संजीव ने वर्ष 1980 में माओवादी आंदोलन की राह पकड़ी थी और गद्दार के नेतृत्व में JNM से जुड़कर 16 राज्यों में विचारधारात्मक प्रचार किया. वह कई बार पुलिस मुठभेड़ों से बाल – बाल बचे और लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के बीहड़ों में सक्रिय रहे. उसकी पहली पत्नी विद्या की 2002 में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी.
दीना ने भी वर्ष 1992 में माओवादी संगठन से जुड़कर कई एरिया दलम में कार्य किया और बाद में उसे CNM की सांस्कृतिक उप – समिति में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली. दोनों दंपति वर्ष 2007 से छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों को संगठित करने में सक्रिय रहे.
तेलंगाना पुलिस ने इस आत्मसमर्पण को अपनी दीर्घकालिक रणनीति की नैतिक जीत बताया है और कहा है कि यह दिखाता है कि माओवाद अब अप्रासंगिक हो गया है. राचकोंडा पुलिस आयुक्त की मौजूदगी में आत्मसमर्पण करने वाले इस वरिष्ठ दंपति को राज्य सरकार द्वारा पुनर्वास योजना के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे.
तेलंगाना पुलिस ने सभी भूमिगत माओवादियों से अपील की है कि वे अपने गांव लौटें और राज्य के विकास में भागीदारी करें. पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सम्मानजनक जीवन जीने हेतु हरसंभव सहायता दी जाएगी.
प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि कुछ संगठन जन आंदोलनों की आड़ में गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही युवाओं से अपील की गई कि वे ऐसे तत्वों से दूर रहें.
पुलिस के मुताबिक, माओवादी विचारधारा अब अप्रचलित हो चुकी है और समाज में उसका प्रभाव तेजी से घट रहा है. छात्र – युवाओं का झुकाव अब मुख्यधारा की ओर है और माओवादी भर्ती में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
“हथियार डालो, मुख्यधारा अपनाओ” तेलंगाना पुलिस की अपील माओवादियों के लिए आज एक यथार्थ विकल्प बनती जा रही है.