सुकमा (डेस्क) – जिले से नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी सफलता सामने आई है. जिले में सक्रिय विभिन्न स्तर के कुल 23 नक्सलियों ने आज शनिवार को औपचारिक रूप से पुलिस और अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लेते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है. इनमें 1 करोड़ 18 लाख रुपये के इनामी नक्सली भी शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिला और 14 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिनमें 3 नक्सली दंपत्ति भी हैं.
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति-2025” एवं स्थानीय रूप से संचालित “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रेरित होकर किया गया है. इसके अतिरिक्त सुकमा के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस व सुरक्षा बलों द्वारा लगातार स्थापित किए जा रहे नवीन सुरक्षा कैम्पों से नक्सलियों का मनोबल टूटा है और वे पुलिस के बढ़ते दबाव व जनता के बीच जागरूकता से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित हुए है.
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का विवरण
PLGA बटालियन में सक्रिय 8 हार्डकोर नक्सली
संगठन स्तर पर :
1 डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM)
6 पार्टी पीपुल्स कमेटी सदस्य (PPCM)
4 एरिया कमेटी सदस्य (ACM)
12 अन्य सक्रिय पार्टी सदस्य
ईनामी नक्सलियों की जानकारी :
11 नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम
4 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम
1 नक्सली पर 3 लाख का इनाम
7 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम
कुल घोषित इनामी राशि : 1 करोड़ 18 लाख रुपये
इस आत्मसमर्पण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला सुकमा में किया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सभी 23 नक्सलियों ने बिना हथियार आत्मसमर्पण किया.
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि वे नक्सल संगठन की अमानवीय, शोषणात्मक और हिंसक कार्यप्रणाली से तंग आ चुके थे. बाहरी नक्सली नेताओं द्वारा स्थानीय आदिवासियों के साथ किए जा रहे भेदभाव, महिलाओं का शोषण, युवाओं को जबरन संगठन में शामिल करने जैसी गतिविधियों ने उनके मन में विद्रोह पैदा कर दिया था. साथ ही, पुलिस द्वारा गांव-गांव में सुरक्षा कैम्प स्थापित कर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों की उपलब्धता ने इन नक्सलियों को यह अहसास दिलाया कि मुख्यधारा से जुड़कर वे अपने जीवन और अपने गांव के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं.
आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जाएगी
छत्तीसगढ़ शासन की “नक्सल आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति – 2025” के अंतर्गत सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को –
50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि व अन्य आवश्यक सुविधाएं जैसे कि निवास, शिक्षा, चिकित्सा एवं रोजगार प्रशिक्षण प्रदान की जाएगी, जिससे वे सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें.
इस आत्मसमर्पण में इन सुरक्षाबलों की भूमिका रही
इस सफलता में जिला बल, डीआरजी सुकमा, वि.आ.शा सुकमा, रेंज फील्ड टीम (RFT) सुकमा व जगदलपुर, सीआरपीएफ की 2, 223, 227, 204, 165 वाहिनियाँ तथा कोबरा की 208वीं वाहिनी के खुफिया एवं जमीनी कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही.
यह आत्मसमर्पण सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि नक्सल उन्मूलन की उस बड़ी प्रक्रिया का संकेत है, जिसमें सरकार, सुरक्षा बल और स्थानीय समाज एक साथ मिलकर माओवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यह आत्मसमर्पण उन सैकड़ों युवाओं के लिए एक संदेश है जो अब भी जंगलों में भ्रमित जीवन जी रहे हैं – “मुख्यधारा में लौटो, जीवन और समाज बदलो.”
इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के बाद छत्तीसगढ़ की धरती पर शांति बहाली की दिशा में यह एक और बड़ा कदम बताया जा रहा है.