सुकमा (डेस्क) – नक्सल प्रभावित मेटागुडेम-ईरापल्ली क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल के तहत सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन द्वारा एक दिवसीय फ्री मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया. यह कैंप न्यू एफओबी मेटामुडेम-ईरापल्ली परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया. इस विशेष चिकित्सा शिविर में ग्राम मेटागुडेम, ईरापल्ली, रसपल्ली और बोटेलंका से आए पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए.

इस आयोजन में डिप्टी कमांडेंट प्रवीण हुड्डा (203 कोबरा), सहायक कमांडेंट आनंद कुमार त्रिपाठी (डी/131 बटालियन) तथा मुकुंद सिंह (ए/131 बटालियन) की सक्रिय उपस्थिति रही. मेडिकल कैंप का नेतृत्व डिप्टी कमांडेंट/चिकित्सा अधिकारी दर्शप्रीत सिंह (131 बटालियन) ने किया। डॉक्टर द्वारा ग्रामीणों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं. साथ ही मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव और समय पर इलाज की जानकारी दी गई. इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों के लिए भोजन की भी समुचित व्यवस्था की गई थी. गर्मी और उमस के बावजूद भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण अब स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा बलों पर भरोसा करने लगे हैं.

ज्ञात हो कि मेटागुडेम-ईरापल्ली जैसे इलाके लंबे समय से नक्सल प्रभाव के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अब वहां की तस्वीर बदल रही है. ग्रामीण अब न केवल मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, बल्कि सुरक्षा बलों के साथ मिलकर गांव के विकास में भागीदार भी बन रहे हैं. सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की लगातार तैनाती से यहां के हालात तेजी से सुधर रहे हैं.
सीआरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि फ्री मेडिकल कैंप एक नियमित और सतत प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है. “यह क्षेत्र हमारा घर है और यहां के ग्रामीण हमारे परिवार हैं. उनकी सुरक्षा, सुविधा और हर समस्या के समाधान के लिए हम सदैव तत्पर हैं,” अधिकारियों ने कहा.
अंततः, यह मेडिकल कैंप न केवल स्वास्थ्य सेवा का एक माध्यम था, बल्कि ग्रामीणों और सुरक्षाबलों के बीच विश्वास और आत्मीयता बढ़ाने का भी एक मजबूत प्रयास साबित हुआ. आने वाले दिनों में भी इस तरह के आयोजन इस क्षेत्र में बदलाव की नई बुनियाद रखेंगे.