जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और अहम सफलता सामने आई है. लंबे समय से अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में सक्रिय कुल 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं. इन सभी पर कुल मिलाकर 37 लाख 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था. इस सामूहिक आत्मसमर्पण को ‘माड़ बचाओ अभियान’ और प्रशासन की रणनीतिक पहलों की बड़ी जीत माना जा रहा है.
इन नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम है सुखलाल, जो कुतुल एरिया कमेटी का कमांडर था. सुखलाल लंबे समय से माड़ डिवीजन के विभिन्न हिस्सों में हिंसक गतिविधियों का संचालन कर रहा था. उसके नेतृत्व में संगठन ने सुरक्षा बलों पर कई घातक हमले किए थे. पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सली इंद्रावती एरिया कमेटी, नेलनार और कुतुल एरिया कमेटी के अंतर्गत सक्रिय थे और इनका नेटवर्क अबूझमाड़ के भीतरी इलाकों तक फैला हुआ था.
जनजागरूकता और विश्वास बहाली बनी सफलता की कुंजी नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रॉबिंस गुरिया ने बताया कि यह आत्मसमर्पण किसी एक दिन की कार्रवाई नहीं बल्कि महीनों से चल रही योजनाबद्ध रणनीति का परिणाम है. ‘माड़ बचाओ अभियान’ के तहत न केवल सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई गई, बल्कि पुलिस कैंपों के माध्यम से स्थानीय आदिवासी समुदाय के बीच विश्वास और संवाद भी मजबूत किया गया. स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी पहलियों ने ग्रामीणों को सरकार के करीब लाया है.
उन्होंने बताया कि पुलिस की “नरम नीति और सख्त कार्रवाई” के संतुलन ने माओवादी संगठनों के मनोबल को तोड़ा है. सुरक्षा बलों की सघन गश्त, तकनीकी निगरानी और स्थानीय लोगों से मजबूत संवाद ने नक्सलियों के लिए जंगलों में टिके रहना मुश्किल कर दिया है. साथ ही आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिए जाएंगे.
संगठन को रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका एसपी गुरिया ने कहा कि यह आत्मसमर्पण केवल संख्या का नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर माओवादियों की हार है. अबूझमाड़ जैसे क्षेत्र, जिसे नक्सल आंदोलन का गढ़ माना जाता रहा है, वहां इस स्तर का आत्मसमर्पण आने वाले समय में और भी बड़े बदलावों की आशा जगाता है. यह संकेत है कि अब जंगल का जनमत हिंसा नहीं, विकास और शांति के पक्ष में खड़ा हो रहा है.
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दिखने लगे हैं बदलाव के संकेत अबूझमाड़ क्षेत्र में जहां पहले पुलिस का प्रवेश भी चुनौतीपूर्ण माना जाता था, अब वहां कैंप स्थापित हो रहे हैं, सड़कें बन रही हैं और स्कूल व स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार हो रहा है. ऐसे प्रयासों से आदिवासी समुदाय का भरोसा पुलिस और सरकार में बढ़ रहा है. इस आत्मसमर्पण के बाद न केवल सुरक्षा परिदृश्य में सुधार की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.
इस बड़ी कामयाबी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समर्पण, संवाद और विकास के जरिए ही नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ा जा सकता है.