सुकमा (डेस्क) – आदिवासी बाहुल्य और संसाधनों की सीमाओं से जूझते सुकमा जिले में जहां खेती हमेशा चुनौतियों से घिरी रही है, वहीं अब उम्मीद की नई किरणें उग रही हैं. एचडीएफसी बैंक की परिवर्तन पहल और आरोह फाउंडेशन की सहभागिता से ग्रामीण किसानों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है. इसी क्रम में सुकमा जिले के 15 गांवों के 450 किसानों को मैनुअल स्प्रेयर प्रदान किए गए हैं, जिससे वे मोटे अनाज अर्थात् मिलेट्स की खेती में बेहतर कार्य कर सकें.

यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना, टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन देना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है.

परिवर्तन की राह पर : किसानों को मिला नया साधन

परंपरागत खेती में संसाधनों की कमी और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण किसान अक्सर पिछड़ जाते हैं. मैनुअल स्प्रेयर की उपलब्धता ने इन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर पैदा किया है. अब वे फसलों पर कीटनाशक और पोषक घोलों का बेहतर और सटीक छिड़काव कर सकेंगे. इससे न केवल फसल की सेहत बेहतर होगी, बल्कि उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा.

एचडीएफसी बैंक परिवर्तन और आरोह फाउंडेशन की यह संयुक्त पहल इन फसलों को और व्यावसायिक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है. मैनुअल स्प्रेयर से जहां लागत घटेगी, वहीं उपज की गुणवत्ता भी बढ़ेगी, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा.

स्थायी कृषि की ओर एक ठोस कदम

सुकमा में मैनुअल स्प्रेयर वितरण की यह पहल सतत कृषि (Sustainable Agriculture) की दिशा में एक व्यावहारिक पहल है. इससे रासायनिक उपयोग को नियंत्रित किया जा सकेगा, छिड़काव सटीक होगा और मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी.

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ – साथ किसान की आय बढ़ाना ही टिकाऊ खेती का मूल उद्देश्य है. इस दिशा में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है और यह पहल उसी कड़ी में एक मील का पत्थर साबित हो रही है.

गांवों में तकनीक की दस्तक

सुकमा जैसे दुर्गम और कभी माओवादी हिंसा से प्रभावित इलाके में जब तकनीक किसानों के हाथों तक पहुंचती है, तो वह केवल खेती का साधन नहीं बनती, वह बदलाव की नींव रखती है.

एचडीएफसी परिवर्तन और आरोह फाउंडेशन की इस पहल से न सिर्फ 450 किसान लाभान्वित हुए हैं, बल्कि इन गांवों में विकास और आत्मनिर्भरता की नई चेतना जागृत हुई है. यह उदाहरण बताता है कि यदि सही नीति, सही संसाधन और सही नीयत हो, तो कोई भी क्षेत्र पीछे नहीं रह सकता.

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