सुकमा (डेस्क) – जिले में पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 2 हार्डकोर माओवादी मारे गए हैं. मारे गए माओवादियों में एक महिला और एक पुरुष शामिल हैं. पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है.
मारे गए माओवादियों की पहचान
पुलिस ने मारे गए माओवादियों की पहचान 5 लाख रुपये के इनामी पेदारास LOS/कमांडर कटेकल्याण एरिया कमेटी (एसीएम) मुचाकी बामन निवासी चिकपाल थाना कटेकल्याण जिला दंतेवाड़ा और कटेकल्याण एरिया कमिटी सीनियर पार्टी सदस्या अनीता अवलम निवासी बीजापुर क्षेत्र के रूप में की है.

पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण ने बताया कि जिला सुकमा के थाना कूकानार क्षेत्रांतर्गत डुनमपारा पुसगुन्ना के जंगल पहाड़ी इलाके में कटेकल्याण एरिया कमेटी में सक्रिय माओवादियों के उपस्थिति के आसूचना पर बीते कल बुधवार को जिला पुलिस बल एवं डीआरजी की संयुक्त पुलिस पार्टी नक्सल विरोधी सर्च अभियान में रवाना हुए थे. अभियान के दौरान बीते कल की शाम 2 बजे से माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार फायरिंग हुई.
घटनास्थल से जवानों ने बरामद की सामग्री
मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है, जिसमें 1 नग 5.56MM इंसास राइफल, 1 नग भरमार बंदूक, 4 नग जिलेटिन, 10 नग डेटोनेटर, 17 नग इंसास जिंदा कारतूस, 5 राउंड का 12 बोर का जिंदा कारतूस, 1 नग साबुन बम, 1 टिफिन बम, वायर, सेफ्टी फ्यूज और अन्य नक्सल सामग्री शामिल है.
पुलिस महानिरीक्षक का बयान
पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी. ने बताया कि वर्ष 2024 में नक्सल विरोधी अभियान में प्राप्त बढ़त को आगे बरकरार रखते हुए वर्ष 2025 में भी बस्तर संभाग अंतर्गत सुरक्षा बलों द्वारा प्रभावी रूप से प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई माओवादी संगठन के विरुद्ध नक्सल विरोधी अभियान संचालित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के मंशा के अनुसार और जनता की इच्छा के अनुसार पुलिस मुख्यालय के मार्गदर्शन में बस्तर रेंज में तैनात सुरक्षा बल सदस्यों द्वारा मजबूत मनोबल एवं स्पष्ट लक्ष्य के साथ बस्तर क्षेत्र की शांति, सुरक्षा व विकास हेतु समर्पित होकर कार्य किया जा रहा है.
नक्सल मुक्त बस्तर मिशन
पुलिस महानिरीक्षक ने दोहराया कि “संकल्प: नक्सल मुक्त बस्तर मिशन” अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती हुई हकीकत है. एक समय आतंक और हिंसा का प्रतीक रहा माओवादी आंदोलन अब अपने अंतिम दौर में पहुँच चुका है, जबकि शांति और विकास की नई सुबह बस्तर में दस्तक दे चुकी है.