सुकमा (नवीन कश्यप) – ज़िला मुख्यालय के गांधीनगर में बीते कल शुक्रवार की शाम एक गाय ने पशु चिकित्सकों के सूझ – बूझ और बेहतर उपचार के कारण स्वस्थ जुड़वा बछिया को जन्म दिया है. यह एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है क्यूंकि गायों मे जुड़वा बच्चो का जन्म सामान्य नहीं होता है. यह खबर छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िला मुख्यालय के गाँधीनगर मे हुई है, जहाँ एक गाय ने जुड़वा बछियों को जन्म दिया है. बताया जा रहा है कि गाय दो नस्लीय है जिसने जुड़वा बछियों को जन्म दिया है, और ऐसी घटना बहुत ही कम देखने को मिलती है.
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम छोड़ चिकित्सक पहुंचे प्रसव करवाने
शुक्रवार के दिन सुकमा जिले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का प्रवास तोंगपाल में था. जहाँ मुख्यमंत्री सुशासन कार्यक्रम में पहुँचे हुये थे. मुख्यमंत्री के प्रवास के मद्देनजर जिले के सभी अधिकारी भी इस कार्यक्रम में व्यवस्था करने में व्यस्त थे. इसी बीच गाय के मालिक को यह बात पता चली तो उन्होंने इस बात को मुख्यमंत्री कार्यक्रम में उपस्थित रही छत्तीसगढ़ महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी को अवगत करवाया और महिला आयोग की सदस्य दीपिका ने चिकित्सकों को उक्त गाय की जानकारी दी और तुरंत सुकमा रवाना होने को कहा. जानकारी मिलने पर चिकित्सकों की टीम तुरंत देरी किये बिना 50 किलोमीटर का सफऱ तय कर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम छोड़ गाय का उपचार करने सुकमा पहुँचे और उपचार किया. जिसके बाद गाय का सफल प्रसव करवाया. जिसके लिए लोगों ने पशु चिकित्सक़ टीम और छत्तीसगढ़ महिला आयोग सदस्य दीपिका की सराहना की है.
पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. भूपेंद्र बघेल ने बताया की गायों में जुड़वा बच्चो का होना सामान्य नहीं है, और ऐसी घटनाएं बहुत ही कम देखने को मिलती है. माना जाये तो देश में 2 प्रतिशत लगभग पशुओं में ही ऐसा होता है, और गाय और भैंस जैसे पशुओं मे गर्भाशय होता है. जिसमे अंडाशय होते है और दो अंडाणु उत्पन्न होने के कारण जुड़वा गर्भावस्था होती है. इस घटना में सामान्य प्रसव न होने के कारण मुख्यतः गाय को काबू कर प्रसव करवाया गया है.
इस पूरे प्रसव के दौरान डॉ.भूपेंद्र बघेल के नेतृत्व में टीम से डॉ. अंबिका नेगी (पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ), डॉ. संतोष कश्यप (पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ चलित चिकित्सा इकाई), डॉ. तन्मय कर्मा (पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ चलित चिकित्सा इकाई), मोहन लाल बघेल (पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी), भुवल नेताम (पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी), सपना चौधरी (पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी चलित चिकित्सा इकाई), संतोष यादव (परिचारक), दया राम चालकी (परिचारक), शेखर पासवन (पायलट चलित चिकित्सा इकाई), राजु राम नाग (पायलट चिकित्सा इकाई) ने अहम भूमिका निभाई है.