बीजापुर (चेतन कापेवार). छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर सात सितारा बेबीलॉन इंटरनेशनल होटल में आयोजित छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सप्तम प्रांतीय अधिवेशन में बीजापुर जिले के कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. दिनांक 23 और 24 सितंबर को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के सभी 33 जिलों से आए हुए जिला समन्वयकों के साथ कवियों कई विद्वान वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति देकर कार्यक्रम को सफल बनाया.

दो दिन तक चले इस कार्यक्रम में कुल 8 सत्र संपन्न हुए जिसमें पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य का नवाचार, माटी महतारी छत्तीसगढ़ी नृत्य वाटिका दूध मंगरा गंडई का नृत्य प्रस्तुति, छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन और अगले दिन छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद महिला साहित्यकार ममन के योगदान, छत्तीसगढ़ के लोक साहित्य, छत्तीसगढ़ी शास्त्री गायन के के पाटिल की प्रस्तुति, छत्तीसगढ़ म नवा पीढ़ी और छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन के साथ इस कार्यक्रम में राज्य के नमीचीन कवियों,कुलपति, प्रोफ़ेसर, गद्य साहित्यकार के साथ पद्मश्री मीर अली मीर, भाषा विज्ञान की विशेषज्ञ और प्रादेशिक न्यूज चैनल की उद्घोषिकाएं, पूर्व आयुक्त एवं पूर्व अध्यक्ष राजभाषा आयोग की गरिमामय उपस्थिति में नई पीढ़ी के कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ करके छत्तीसगढ़ी के महत्व को बताया. कार्यक्रम का उद्घाटन नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया और संसदीय सचिव व विधायक कुंवर सिंह निषाद के करकमलों से छत्तीसगढ़ महतारी और वीणा पाणी के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर राजगीत के साथ किया गया. जिला बीजापुर से जिला समन्वयक गायत्री ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले के युवा कवि राजबाबू बीरा, अमितेश तिवारी और जीवनलाल साहू ने पूरे कार्यक्रम में सभी सत्र में उपस्थिति होकर बीजापुर जिले का प्रतिनिधित्व किया. कार्यक्रम में आए हुए सभी कवियों को राजभाषा आयोग की तरफ से हैंड बैग डायरी पेन एवं त्रैमासिक पत्रिका सुरहुति को प्रदान किया गया और सभी जिला समन्वयकों को छत्तीसगढ़ी पटका और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. पूरे कार्यक्रम में राजभाषा आयोग के सचिव अनिल भतपहरी का अमूल्य योगदान रहा.

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