सुनील कश्यप, सुकमा- बस्तर संभाग का सुकमा जिला बेहद ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. नक्सलवाद होने की वजह से ग्रामीणों तक मूलभूत सुविधा सही रीति से नहीं पहुंच पाती है. लेकिन अब जिला प्रशासन के द्वारा लगातार विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है. और नक्सल प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाने का काम किया जा रहा है. इसी कड़ी में ढाई दशक के बाद सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित सात गांवों को बिजली की सौगात मिली है. जिससे 342 परिवारों के घरों में सीधे बिजली की रौशनी पहुंची है. जिसके कारण ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
छत्तीसगढ़ राज्य के अंतिम छोर में बसा बस्तर संभाग के सुकमा जिले के अति संवेदनशील इलाके में बसे करीब 7 गाँव डब्बाकोंटा, पिड़मेल, एकलगुड़ा, दुरामांगू, तुमबांगु, सिंगनपाड़ और डोकपाड़ के ग्रामीणों को बिजली की सौगात मिली है. जिसके कारण ग्रामीण में उत्साह देखने को मिल रहा है. इससे पहले इन सात गावों के ग्रामीण सौर ऊर्जा पर निर्भर थे. कुछ गाँव के ऐसे भी ग्रामीण थे जिन्हें सौर ऊर्जा का लाभ भी नहीं मिल रहा था. जिसके कारण ग्रामीण दीया या कंडील के रौशनी के सहारे रात गुजारा करते थे. साथ ही बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरत की चीजों के लिए बिना बिजली के रौशनी से ग्रामीणों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. अब इन गांवों को विद्युत की व्यवस्था हो गई है. और 342 परिवार को बिजली की रौशनी मिली है.
सुकमा जिले के कलेक्टर हरीश एस. ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का निर्देश है कि जिले में सबसे गरीब व पिछड़े लोगों के लिए काम करें. और जिले में सरकार की मंशा अनुरूप कार्य किया जा रहा है. प्राथमिकता के साथ जिले के अतिसंवेदनशील इलाके में बुनियादी सुविधा पहुंचाई जा रही है. फिलहाल 7 गाँव अंधेरे से दूर हुए हैं. जल्द ही आसपास के अन्य गांवों को भी अंधेरे से दूर करके बिजली पहुंचाया जाएगा.
इधर जिले के बिजली विभाग के मुख्य कार्यपालन अभियंता जोसेफ़ केरकेट्टा ने बताया कि अतिसंवेदनशील इलाके में बसे इन गांवों में बिजली का लाइन बिछाना मुश्किल व चुनौतीपूर्ण था. यह इलाका जिला मुख्यालय से काफी दूर बसा है. जहां तक विद्युत सामग्री पहुंचाना चुनौती पूर्ण था. यह गाँव घने जंगलों के बीच बसा हुआ है. इन गांवों में मजदूर भी बेहद मुश्किल से पहुंचे हैं. तमात चुनौतियों को मात देते हुए बिजली विभाग ने इस काम को किया है. और ग्रामीणों के चेहरे में खुशी आई है.
ग्रामीणों में ख़ुशी की लहर
आज पूरा भारत देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. और नक्सलगढ़ के सभी 7 गांवों में बिजली की सुविधा पहुंचने से ग्रामीण बेहद ही खुश नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों के चेहरे की ख़ुशी साफ जाहिर कर रही है कि बिजली पहुंचने से उन्हें इसका कितना लाभ मिलेगा. और बिजली के बैगर की ज़िंदगी से आजादी मिली है. ग्रामीणों ने मुस्कुराते हुए बताया कि हमनें कभी भी नहीं सोचा था कि इतने घने जंगलों के बीच स्थित घरों में बिजली पहुँचेगी. पहले हम सौर ऊर्जा पर निर्भर रहते थे. गाँव के सभी घरों में पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती थी. और बारिश के दिनों में बिजली आती ही नहीं थी. अब पहली बार हमारें घरों तक बिजली पहुंचा है. जो काफी ख़ुशी की बात है.
1990 के दौरान सुकमा के इन गांवों में बिजली की कनेक्टिविटी थी. लेकिन माओवादियों ने इन गांवों के आस पास मौजूद ग्रिड लाइन और बिजली के खंबों को पूरी तरह से नुकसान पहुंचाया था. जिसके बाद इन क्षेत्रों में नक्सली आतंक इतना बढ़ा बिजली सेवा बहाली नहीं किया गया. अब जैसे जैसे जिले में नए सुरक्षाकैम्प लग रहे हैं. और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के चलते नक्सली इन दिनों बैकफ़ुट पर हैं. और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य किया जा रहा है.