सुनील कश्यप, जगदलपुर- बस्तर संभाग के इकलौते नगर निगम में जगदलपुर में महापौर सफिरा साहू के ख़िलाफ़ भाजपाइयों के द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव धराशायी हो गया है. और बस्तर कलेक्टर ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है. दरअसल 5 बिंदुओं पर भाजपा पार्षद दल के द्वारा महापौर सफिरा साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. जिसका सम्मिलन आज जगदलपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय में किया जाना था. इसके लिए भाजपा पार्षद दल भाजपा कार्यालय से पैदल रैल्ली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे. लेकिन इस प्रक्रिया में कांग्रेस की महापौर, निगम अध्यक्ष व अन्य पार्षद दल अनुपस्थित था. जिसके कारण इसे सिरे से खारिज किया गया है.

निगम के नेता प्रतिपक्ष संजय पांडेय के बताया कि कुछ समय पहले महापौर के खिलाफ भाजपा पार्षद दल के द्वारा पांच बिंदुओं पर भ्रष्टाचार का अविश्वास प्रस्ताव दिया गया था. महापौर को भ्रष्टाचार का उत्तर सदन में उपस्थित रहकर देना चाहिए था. लेकिन महापौर सफिरा साहू ने अपनी निश्चित हार जानी और पूरे पार्षदों को लेकर जंग करने के बजाय कायरता से भाग जाना उचित समझा. साथ ही कहा कि ऐसे कृत्य में कांग्रेस के विधायक, सांसद व कांग्रेस पार्टी का संगठन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए यह कार्य किया है. इससे पहले कांग्रेसी पार्षद कोमल सेना ने 25-25 हजार रुपये लेकर गरीबों को लुटा था. जिसे बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. ठीक उसी प्रकार आज सफिरा साहू को भी बचाने के लिए कांग्रेस ने अपनी ताकत झोंकी है. साथ ही कहा कि एक दिन पहले महापौर सफिरा साहू कह रहे थे कि कांग्रेस के सभी पार्षद एक साथ हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रमोद दुबे ने बंद कमरे में एक-एक पार्षदों की नब्ज टटोली तब उन्हें पता चला कि महापौर के साथ कोई पार्षद नहीं है. जिसके चलते कांग्रेस की लाज बचाने के लिए भ्रष्टाचारी महापौर सफिरा साहू का समर्थन करते हुए सभी पार्षद दल को मुख्यमंत्री के पास लेकर गए. और जिस प्रकार से उत्तर देने के बजाय मैदान छोड़कर महापौर भाग गए हैं. यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है.

इधर बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आज 3 बजे विशेष सम्मिलन आहूत किया गया था. जिसमें भाजपा के 19 पार्षद उपस्थित हुए वहीं महापौर सहित 29 पार्षद अनुपस्थित रहे. अविश्वास प्रस्ताव के हिसाब से कोरम पूरा होना जरूरी है. कोरम पूरा नहीं होने के अभाव में भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करके निरस्त किया गया है.

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