दंतेवाड़ा (कवि सिन्हा)। शक्ति पीठ दंतेवाड़ा में ज्योति कलश प्रज्वलन की शुरूआत अब से लगभग 33 साल पहले 35 ज्योति कलश से हुई थी। यहां के तत्कालीन न्यायाधीश और वकीलों ने मिलकर इसकी शुरूआत की थी। ज्योति कलश की आभा तेजी से बढ़ती गई और आज यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। यह मांई दंतेश्वरी की शक्ति और आशीर्वाद का ही प्रताप है। इस चैत्र नवरात्र में कुल 3 हजार 778 ज्योति कलश प्रज्वलित हुए हैं। इनमें घी के 893 और तेल के कुल 2 हजार 885 ज्योति कलश शामिल हैं। दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी शक्ति पीठ में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र पर ज्योति कलश प्रज्वलित होते हैं। इसकी शुरूआत की कहानी बड़ी रोचक है। 1990 में यहां पदस्थ रहे तत्कालीन न्यायाधीश लक्ष्मण पवैया और अधिवक्ता आरएन ठाकुर, कौशल अवस्थी, दिनेश राठौर तथा अशोक जैन ने पहली ज्योत जलायी थी। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक पहले 35 ज्योति कलश से यह
प्रारंभ हुआ। शुरूआत में इसकी 151 और घी के लिए 201 रूपए निर्धारित थी। वर्तमान में घी के कलश के लिए 21 सौ और तेल ज्योति कलश के लिए 11 सौ
रूपए की राशि ली जा रही है। 1990 में पहला ज्योति कलश श्रवण चौहान के नाम से प्रज्वलित हुआ। अधिवक्ता दिनेश राठौर बताते हैं कि मांई दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा और आस्था दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। दंतेवाड़ा ही नहीं बल्कि देश-विदेश से भी श्रद्धालु मनोकामना दीप प्रज्वलित कराते हैं। 33 साल पहले छोटी शुरूआत हुई और अब मांई जी की भक्ति की आभा सात समुंदर पार तक पहुंच चुकी है। मनोकामना दीपों की संख्या बढ़ी तो ज्योति कलश के लिए भवन भी तैयार करवाया गया। आपस में चंदा कर यह भवन निर्मित हुआ, जहां आज भी ज्योति कलश प्रज्वलित होते हैं। भवन छोटा पड़ा तो छोटी माता की मंदिर और बाजू में भी ज्योति कलश प्रज्वलित होने लगी। अब 11 हजार ज्योति कलश क्षमता वाला नया भवन भी तैयार होने वाला है।
इधर इस चैत्र नवरात्र पर कुल 3 हजार 718 ज्योति कलश प्रज्वलित हुए हैं। इनमें घी के 893 और तेल के 2 हजार 885 ज्योति कलश शामिल हैं। तेल के लिए 211 भक्तों ने ऑन लाईन रसीद भी कटवायी है, वहीं 15 भक्त आजीवन तेल ज्योति कलश जलवाते हैं। इधर घी के लिए 26 भक्तों के आजीवन ज्योति कलश प्रज्वलित होते हैं। 75 भक्तों ने ऑन लाईन रसीस कटवायी है। मांई दंतेश्वरी के भक्त विदेश में भी हैं। कैलिफोनिया के अमित राय, वाशिंग्टन के सुषमा और मनीष राय ने भी ज्योत जलवाये हैं। इसी तरह इंग्लैड से भी एक भक्त ने मांई जी के प्रति आस्था जताते ज्योति कलश प्रज्वलित कराये हैं। इस बार चैत्र नवरात्र में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अलावा दुर्ग, रायपुर, धमतरी, बालोद सहित अलग-अलग जिलों से भी भक्तों ने ज्योत जलवाये हैं। मुंबई और हैदराबाद से भी श्रद्धालु ज्योति कलश प्रज्वलित कराकर अपनी आस्था प्रगट कर रहे हैं। आजीवन ज्योति कलश प्रज्वलित कराने घी के कलश के लिए 51 हजार और तेल ज्योति कलश के लिए 31 हजार की रसीद कटवानी होती है।
डिजिटल युग में मांई दंतेश्वरी शक्ति पीठ की वेबसाईट भी तैयार हुई है, जिसमें शक्ति पीठ में उपलब्ध सुविधाओं और अन्य जानकारियां शामिल हैं, इसके जरिये ज्योति कलश के लिए ऑन लाईन रसीद की भी सुविधा उपलब्ध करायी गई है। भक्तों के मन में मांई दंतेश्वरी के प्रति लगातार आस्था बढ़ती जा रही है। हर नवरात्र में माता के भक्त अपनी मनोकामना लेकर मांई के चरणों में शीश नवाते हैं और असीम शांति का अनुभव करते हैं। यहां के रहवासियों के सुख, समृद्धि और प्रगति की साक्षी मांई दंतेश्वरी हर भक्त की मनोकामना जरूर पूरी करती हैं।