बीजापुर (चेतन कापेवार)। मनरेगा के तहत जिले में काम नही मिलने से लोग पड़ोसी राज्य में मिर्ची तोड़ने जा रहे है। पंचायतों में बनाई गई पलायन पंजी खाली है। फिर भी दलाल सक्रिय रूप से यहां के मजदूरों को पड़ोसी राज्य लेकर जा रहे हैं। शासन प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बाद भी नजर अंदाज किए हुए है। उक्त आरोप जेसीसीजे के जिला अध्यक्ष विजय झाड़ी ने प्रेसनोट कर लगाया है।

जेसीसीजे के जिला अध्यक्ष विजय झाड़ी ने कहा कि मनरेगा के ज्यादातर कार्य मशीनों से हो रहे हैं जिसके कारण मजदूरों काम नही मिल रहा है। यहां परंपरागत रूप से इस सीजन में मिर्ची तोड़ने ग्रामीण पड़ोसी राज्य तेलंगाना और महाराष्ट्र जाते रहे हैं। पिछले दिनों गोदावरी नदी में नहाने के दौरान बीजापुर के एक मजदूर परिवार के मासूम बच्चे अंकित की डूबने की खबर आई थी। जोकि यहां से मिर्ची तोड़ने की मजदूरी के लिए गया था। उस बच्चे के मौत के जिम्मेदार आखिर कौन है। सरकार यहां आदिवासी ग्रामीणों को रोजगार दिलाने में नाकाम रही है। ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी के कानून की अवहेलना कर ट्रेक्टर और डोजर मालिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके कारण मिर्ची सेठों के दलाल के झांसे में आकर लोग पलायन कर रहे हैं।
जेसीसीजे नेता विजय झाड़ी ने कहा कि पंचायत से लेकर जिला पंचायत के कांग्रेस पदाधिकारियों ने आखिर कौन से ऐसे विकास कार्य के लिए तीन से चार डोजर, टिप्पर, जेसीबी और ट्रेक्टर खरीदें हैं? पंचायत के पदाधिकारी ठेकेदार बन कर कार्य रहे हैं, नगद भुगतान के नाम पर कमीशनखोरी चरम पर है। ऐसे में मजदूरों को काम के तलाश में बाहर जाना मजबूरी बन गई है। जेसीसीजे मांग करती है की मृतक मासूम अंकित के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा दे और मजदूरों के हक में डाका डालने वालों पर जांच करा कर कार्रवाई की जाए अन्यथा जेसीसीजे सड़क से सदन तक लड़ाई के लिए मजबूर होगा।

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