बस्तर- नवरात्रि के पहले दिन बस्तर दशहरे की एक महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना विधि विधान के साथ निभाई गई. जगदलपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर में राज परिवार के सदस्य पहुंचकर कलश की स्थापना करते हुए दंतेश्वरी देवी से बस्तर के लिए दुआएं मांगी. इस रस्म में रियासतकाल के हथियारों को रखकर अखंड ज्योत जलाई जाती है. जिसे हवन के बाद बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी में प्रवाह कर दिया जाता है.
बस्तर राज परिवार सदस्य कमलचंद भंजदेव का कहना है कि काछनगादी रस्म के अगले दिन नवरात्रि के अवसर पर दंतेश्वरी मंदिर के भीतर कलश स्थापना की रस्म निभाई जाती है. जिसमें दो कलश की स्थापना करते हैं. एक ज्योति कलश और दूसरा शक्ति की कलश होती है. शक्ति की कलश में रियासतकाल के तलवारों को रखकर उसके सामने अखंड ज्योत जलाई जाती है. यह ज्योत लगातार आठ दिनों तक जलता है. जिसे यह बुझने नहीं दिया जाता है. अष्टमी में हवन के बाद इसे इंद्रावती नदी में प्रवाह कर दिया जाता है. कलश स्थापना के दौरान राज परिवार के सदस्य यह संकल्प लेते हैं कि बस्तर दशहरे में किसी प्रकार का कोई बाधा उत्पन्न ना हो. साथ ही सभी वर्ग के लोगों का देवी ख्याल रखें. यह सदियों पुरानी परंपरा है. दंतेश्वरी देवी का मंदिर जिस-जिस स्थान में मौजूद है, वहां कलश की स्थापना की जाती है. पहला अखंड ज्योत दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी व राज परिवार के सदस्य ही जलाया करते हैं.
कलश स्थापना के दौरान इस वर्ष बस्तर में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भी कामना की गई. बीते दिनों जैसे बस्तर में बाढ़ आई थी यह काफी विकराल थी. कई लोग इससे प्रभावित हुए थे. जिन्हें काफी तकलीफें हुई थी. उनके सहनशीलता के लिए कामना की गई. बस्तर के लोग खुशहाल रहे और बस्तर निरंतर विकसित हो इन्हीं मनोकामना के साथ अखंड ज्योत जलाई गई.