बीजापुर (डेस्क) – यह एक ऐसा पल था जहाँ आँखें नम थीं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था. ग्राम पंचायत बरदेला की मिट्टी ने आज अपने उस लाड़ले सपूत को प्रतिमा के रूप में अपने बीच फिर से पाया, जिसने देश की अखंडता के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए. शहीद प्रधान आरक्षक बुधराम कोरसा की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें वह सम्मान दिया गया, जिसके वे हकदार हैं.

एक कायराना हमला, एक अमर वीर

​वह दिन आज भी ज़हन में सिहरन पैदा कर देता है, जब अम्बेली नाला के पास माओवादियों ने घात लगाकर आईईडी विस्फोट किया था. उस कायरतापूर्ण हमले ने हमसे हमारे 10 जांबाज योद्धा छीन लिए थे. शहीद बुधराम कोरसा ने अंतिम सांस तक अपने कर्तव्य का पालन किया. आज उनकी प्रतिमा का अनावरण उस दुखद घटना की याद तो दिलाता है, लेकिन साथ ही यह संदेश भी देता है कि “वीर मरते नहीं, वे अमर हो जाते हैं.”

गौरव के प्रतीक : वक्ताओं के विचार

​कार्यक्रम में उपस्थित पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा:

बलिदान व्यर्थ नही जाएगा : शहीद कोरसा का त्याग ‘संकल्प मार्च 2026’ की उस मशाल की तरह है, जो बस्तर को नक्सलवाद के अंधेरे से मुक्त कराएगी.

समाज के प्रेरणास्रोत : पुलिस बल के साथियों ने उन्हें एक निडर योद्धा बताया, जिनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी.

शांति का आधार : आज क्षेत्र में जो विकास और शांति दिख रही है, वह इन्हीं शहीदों के लहू से सींची गई है.

परिजनों का धैर्य और समाज का नमन

​जब प्रतिमा से पर्दा हटा, तो उपस्थित जनसमूह की आँखें भर आईं. शहीद के परिजनों के लिए यह क्षण दुखद था कि उनका लाल अब उनके बीच नहीं है, पर यह गर्व कहीं बड़ा था कि उनका बेटा पूरे राष्ट्र की धरोहर बन चुका है. दो मिनट के मौन के साथ पूरा बरदेला और जांगला क्षेत्र अपने इस वीर नायक के चरणों में नतमस्तक हुआ.

​”शहादत का दुख तो है, पर इस बात का अभिमान भी है कि जब राष्ट्र को जरूरत थी, तो बरदेला का एक बेटा सबसे आगे खड़ा था.”

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