सुकमा (नवीन कश्यप) – सुदूर वनांचल के पहाड़ों पर जब सुबह की पहली किरण पड़ी, तो कुछ कदमों की आहट ने सन्नाटे को तोड़ दिया. ये कदम किसी पर्यटक के नहीं, बल्कि उन ‘स्वास्थ्य वीरों’ के थे जो अपने कंधों पर वैक्सीन का बॉक्स नहीं, बल्कि सुकमा के भविष्य की सुरक्षा का बोझ लेकर चल रहे थे. यह कहानी है सुकमा जिले के पोरों कोंडा सांवली गांव की, जहां पहुंचने के लिए न सड़कें हैं, न पुल. रास्ता है तो बस ऊंचे पहाड़, कटीले जंगल और पत्थरों भरी पगडंडियां. लेकिन प्रशासन के अटूट संकल्प और स्वास्थ्य कर्मियों के जज़्बे ने साबित कर दिया कि दुर्गम रास्ते भी मंज़िल के आगे घुटने टेक देते हैं.
23 मासूम जिंदगियां और घण्टों का पैदल सफर

कोंडासांवली उप स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाला यह गांव आज भी आधुनिकता की पहुंच से कोसों दूर है. पल्स पोलियो अभियान के तहत जब टीम को यहाँ का लक्ष्य मिला, तो चुनौती हिमालय जैसी थी. स्वास्थ्य कर्मियों ने मीलों लंबी पैदल यात्रा तय की. फिसलन भरी ढलानें और जंगली जानवरों का डर भी उनके कदमों को रोक नहीं पाया.

घंटों के संघर्ष के बाद जब टीम गांव पहुंची, तो वहां का दृश्य भावुक कर देने वाला था. कच्चे मकानों के बाहर खड़ी माताओं की आंखों में टीम को देखकर एक भरोसा जागा. स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव के 23 मासूम बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई. किसी की कांपती हथेलियों में जब बच्चे को दवा मिली, तो स्वास्थ्य कर्मियों की थकान पल भर में संतोष में बदल गई.
कलेक्टर का मिशन : ‘कोई बच्चा न छूटे’
कलेक्टर अमित कुमार के कुशल नेतृत्व में जिले में यह अभियान किसी उत्सव की तरह नहीं, बल्कि एक ‘मिशन’ की तरह चलाया जा रहा है. आंकड़ों की बात करें तो सुकमा ने पहले ही दिन अपनी प्रतिबद्धता साबित कर दी है:
कुल लक्ष्य : 37,815 बच्चे (0-5 वर्ष)
पहले दिन की उपलब्धि : 33,273 बच्चों को दी गई खुराक.
अगला कदम : 22 और 23 दिसंबर को स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को कवर करेंगी.
छालों में छिपी है सफलता की कहानी
इस अभियान की असली चमक सरकारी फाइलों में नहीं, बल्कि उन स्वास्थ्य कर्मियों के पैरों के छालों में है जो पहाड़ों पर चलते हुए आए. यह कहानी उन हाथों की है जो थककर भी नहीं रुके. कलेक्टर अमित कुमार ने इस समर्पण की सराहना करते हुए कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जिले का कोई भी बच्चा, चाहे वह कितने ही दुर्गम क्षेत्र में क्यों न हो, पोलियो के खतरे से सुरक्षित रहे. पोरों कोंडा सांवली की सफलता हमारी टीम के अटूट समर्पण का प्रमाण है.”
बड़ी बात

यह खबर केवल एक टीकाकरण अभियान की नहीं है, यह उस मानवीय जिजीविषा और सरकारी तंत्र के उस मानवीय चेहरे की है, जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचने का संकल्प रखता है.