सुकमा (डेस्क) – ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले ‘पेसा’ (PESA) कानून के लागू होने के गौरवमयी अवसर पर सुकमा जिले के सोनाकुकानार में ‘पेसा दिवस’ मनाया गया. कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कानून की ताकत बताते हुए जागरूक किया गया.

पूर्वजों की प्रथाओं का संरक्षण करेगा यह कानून

​कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने कहा कि हमारी पारंपरिक व्यवस्था और संस्कृति को सुरक्षित रखने का एकमात्र जरिया पेसा कानून है. उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने जिन प्रथाओं और रीति-रिवाजों का पालन किया, पेसा कानून उन्हें संवैधानिक सुरक्षा देता है. यह कानून ग्राम सभा को वास्तविक शक्ति देता है, लेकिन इसकी सफलता के लिए हम सभी का जागरूक और सचेत होना अनिवार्य है.”

जल, जंगल और जमीन पर ग्राम सभा की सर्वोच्चता

​समारोह में पहुंचे विषय विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को विस्तार से बताया कि पेसा कानून के तहत किसी भी विकास परियोजना या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की पूर्व अनुमति अनिवार्य है. इसके अलावा:

● ​प्राकृतिक संसाधन : जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण का अधिकार ग्राम सभा को है.

● ​स्थानीय न्याय : गांव के छोटे-मोटे विवादों का निपटारा अब ग्राम सभा के माध्यम से किया जा सकता है.

● ​विकास की निगरानी : गांव में संचालित विकास योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी ग्रामीणों के हाथ में है.

पुस्तकों का वितरण : कानून को घर-घर पहुंचाने की पहल

​ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति शिक्षित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान पेसा कानून की पुस्तकों का वितरण किया गया. वक्ताओं ने कहा कि जब तक ग्रामीण इस कानून को पढ़ेंगे और समझेंगे नहीं, तब तक वे अपने अधिकारों का पूर्ण लाभ नहीं उठा पाएंगे.

​बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सोनाकुकानार सहित आसपास के दर्जन भर गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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