जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर जिले में रविवार को पल्स पोलियो महाअभियान ‘दो बूंद जिंदगी की’ का आगाज़ किसी उत्सव की तरह हुआ. हाड़ कंपा देने वाली ठंड और रविवार के अवकाश के बावजूद, बस्तरवासियों ने अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य को प्राथमिकता दी. सुबह सूर्योदय के साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बूथों पर माता-पिता की लंबी कतारें लग गईं, जो स्वास्थ्य के प्रति जिले की बढ़ती जागरूकता का जीवंत उदाहरण है.
तिरंगा चौक से हुआ विधिवत शुभारंभ

अभियान की औपचारिक शुरुआत जिला मुख्यालय जगदलपुर के हृदय स्थल तिरंगा चौक पर हुई. यहाँ महापौर संजय पांडे ने नन्हे-मुन्नों को पोलियो रोधी दवा पिलाकर जिले में इस महाअभियान का शुभारंभ किया. महापौर ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य ही समृद्ध राष्ट्र की नींव है और बस्तर का हर नागरिक इस सुरक्षा चक्र का हिस्सा बन रहा है.
वहीँ, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने तोकापाल और टेकामेटा के ग्रामीण अंचलों का दौरा किया. उन्होंने खुद बच्चों को दवा पिलाई और अभिभावकों का उत्साहवर्धन करते हुए बस्तर को पोलियो मुक्त बनाए रखने की अपील की.
आंकड़ों में पहले दिन की सफलता
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय बसाक ने बताया कि जिले में 0 से 5 वर्ष तक के 1,24,377 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य है. पहले दिन के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे:

● ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज: 92 प्रतिशत
● शहरी क्षेत्रों में कवरेज: 82 प्रतिशत
● आदर्श बूथ: जिले के 40 बूथों पर 100% टीकाकरण का लक्ष्य पहले ही दिन पूरा कर लिया गया (सर्वाधिक तोकापाल में 19 बूथ).
प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था
दुर्गम क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों तक पहुँचने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे:
कार्यबल : 498 बूथों पर 1992 टीकाकरण कर्मी और 100 सुपरवाइजर तैनात रहे.
मोबाइल व ट्रांजिट टीमें : बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हाट-बाजारों और ईंट-भट्ठों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए 20 मोबाइल और 24 ट्रांजिट टीमें सक्रिय रहीं.
सहयोग : मितानिनों और बीएससी नर्सिंग की छात्राओं ने घर-घर संपर्क कर लोगों को बूथ तक लाने में अहम भूमिका निभाई.
ऐतिहासिक विरासत और अगला कदम
बस्तर के लिए यह गौरव की बात है कि यहाँ 1996 के बाद से पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है. इस रिकॉर्ड को बरकरार रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ‘मॉप-अप’ राउंड शुरू करेगा.

विशेष नोट : जो बच्चे रविवार को किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुँच पाए, उन्हें 22 और 23 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाएंगी. विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे टीकाकरण दल का सहयोग कर बस्तर को सुरक्षित रखें.