जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग ने आज एक निर्णायक मोड़ ले लिया. लंबे समय से सोशल मीडिया और चौक-चौराहों पर चल रही चर्चाएँ अब ज़मीन पर उतर आई हैं. स्थानीय शहीद पार्क में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद सर्वसम्मति से ‘बस्तर स्वराज संगठन’ का गठन किया गया, जिसने स्पष्ट कर दिया है कि बस्तर अब अपनी उपेक्षा और संसाधनों के शोषण को और बर्दाश्त नहीं करेगा. संगठन ने “भीख नहीं हक चाहिए” के नारे के साथ अपने आंदोलन की शुरुआत की है.

करोड़ों का लोहा बाहर, जमीन पर नही आ रहा विकास

​बैठक में यह संदेश साफ़ तौर पर दिया गया कि बस्तर में विकास की धीमी रफ़्तार और मूलभूत सुविधाओं की कमी ही पृथक राज्य की मांग का मुख्य कारण है. संगठन ने सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाया:

​”संसाधन बस्तर के, मुनाफ़ा बाहर — यह मॉडल अब स्वीकार नहीं होगा.”

​संगठन के अनुसार, बस्तर से प्रतिदिन करोड़ों रुपये का लौह अयस्क बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन इसके बदले में न तो क्षेत्र में बड़े उद्योग लग रहे हैं, न स्थानीय युवाओं को नौकरी मिल रही है, और न ही बुनियादी ढाँचे में कोई बड़ा निवेश दिख रहा है.

बेरोजगारी और पलायन : एक बड़ी असफलता

​उपस्थित सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि अपार संसाधनों के बावजूद, स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बेहद कम हैं. इस कारण हज़ारों युवा रोज़गार की तलाश में बस्तर छोड़ने को मजबूर हैं, जिसे उन्होंने ‘बड़ी प्रशासनिक असफलता’ करार दिया.

​बस्तर स्वराज संगठन का कहना है कि:

● ​योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ों पर: बस्तर की ज़रूरतों के हिसाब से योजनाएँ नहीं बनतीं, और जो बनती हैं वे ज़मीन पर अधूरी रह जाती हैं.

● ​प्रशासनिक पहुँच सीमित: विशाल भौगोलिक क्षेत्र होने के बावजूद, दूर-दराज़ के गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.

● ​सांस्कृतिक पहचान ख़तरे में: जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय नियंत्रण वाली व्यवस्था आवश्यक है.

अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई

​संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि बस्तर की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान के लिए एक गैरराजनैतिक आंदोलन है. बैठक में प्रमुख रूप से रोहित सिंह आर्य, प्रदीप गुहा, नरेंद्र भवानी, बिजली बैध, नीलम कुशवाहा सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे.

संगठन ने सभी नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे बस्तर के भविष्य के लिए इस अधिकार की लड़ाई में अपनी आवाज़ उठाएँ और आंदोलन को मज़बूत बनाएँ.

आगामी कदम : बस्तर स्वराज संगठन जल्द ही संगठन की रूपरेखा तय करने और आंदोलन की रणनीति घोषित करने वाला है.

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