जगदलपुर (डेस्क) – जिले में भानपुरी पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है, जिसने किसानों और व्यापारियों के बीच भरोसे की नींव हिला दी है. एक चालाक ट्रक चालक/मालिक, जो किसानों का मक्का उनके विश्वास पर लोड करता था, उसने करीब ₹6,00,000/- कीमत का 33 टन मक्का लेकर फरार हो गया. आरोपी ने न केवल एक किसान, बल्कि एक ही महीने में ओडिशा और आंध्रप्रदेश के ट्रेडर्स को भी झांसे में लेकर लाखों का चूना लगाया.
हाई स्पीड चेंज : 1,000 KM दूर आंध्रप्रदेश से हुई गिरफ्तारी
प्रार्थी हरदेव बघेल की शिकायत पर तत्काल एक्शन लेते हुए, पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में भानपुरी पुलिस ने एक स्पेशल टीम का गठन किया. सूत्रों और तकनीकी जानकारी के आधार पर, टीम ने सीधे आंध्रप्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले में दबिश दी. विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन पुलिस ने आरोपी रहिमन टीकमदास बड़ाबाग (उम्र 39 वर्ष) और उसके ₹20 लाख के ट्रक (CG08-AF-6611) को गोलागुण्डम, आंध्रप्रदेश में धर दबोचा. यह गिरफ्तारी हजारों किलोमीटर दूर, राज्य की सीमाओं को पार करके की गई.
बेईमानी का काला कारोबार : एक ही मक्के को दो – दो नामों से बेचा
पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया वह और भी चौंकाने वाला है. आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने एक महीने के भीतर तीन अलग-अलग ट्रेडर्स को निशाना बनाया:
पहला धोखा (14.11.2025) : एमएच ट्रेडर्स (तारा ट्रेडर्स) का मक्का लोड किया और चुपके से ओडिशा के बोरिगांव में बेच दिया.
दूसरा धोखा (20.11.2025) : फरसगांव के बाबा ट्रेडर्स का माल लिया और आंध्रप्रदेश में परमेश्वरी बायोटेक को ‘तारा ट्रेडर्स’ का बताकर बेच दिया.
तीसरा धोखा (25.11.2025) : सालेमेटा के किसान (प्रार्थी हरदेव बघेल) के बेटे का मक्का लोड किया और उसे भी आंध्रप्रदेश में परमेश्वरी बायोटेक को ‘बाबा ट्रेडर्स’ का बताकर बेच दिया.
आरोपी अपने पुराने जान-पहचान का फायदा उठाता था और विश्वास को तोड़कर लाखों रुपये अपने बैंक खाते में ले रहा था. पुलिस ने तुरंत उसके बैंक खातों को ब्लॉक कर दिया है.
अब जेल की रोटी : धारा 316 (3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज

भानपुरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 316(3) बीएनएस के तहत गंभीर मामला दर्ज किया है. जब्त किए गए 33 टन मक्का और ट्रक के साथ आरोपी को न्यायालय जगदलपुर में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया है. यह कार्रवाई उन सभी धोखेबाजों के लिए एक कड़ा संदेश है जो किसानों के भरोसे और मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ करते हैं.