झोपड़ी में दफन अरमान, मुफलिसी में तिल तिल घुट रहा दम,सरकार और सरकारी वायदों से उठा भरोसा, गरीबी ऐसी की पसीज जाएं किसी का भी दिल
बीजापुर (चेतन कापेवार)। हाथ-पांव की हड्डियां कमजोर पड़ चुकी है, त्वचा सिकडु चुकी है, आंखें धुंधली और चेहरे को बेतहाशा झुर्रियों ने ढक लिया है, यहां तक कि तन को…