दंतेवाड़ा (कवि सिन्हा)। जनपद सदस्य मुकेश कर्मा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में मजदूर संघ एस के एम एस पर आदिवासी समुदाय का विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि दिनांक 8 सितम्बर से हम 12 पंचायत के युवा बेरोजगार आदिवासियों के साथ पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि एनएमडीसी बचेली में लेबर सप्लाई में नियुक्ति प्रदान करने के लिए शान्तिपूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे थे।आंदोलन के चौथे दिन प्रबन्धन से सकारात्मक बातचीत के बाद हमने आंदोलन को स्थगित कर दिया, लेकिन मजदूर यूनियन एसकेएमएस बचेली ईकाई ने एक रैली निकाल कर हमारे बेरोजगार युवाओं के आंदोलन का विरोध किया है। जिसका हम आदिवासी बेरोजगार इस कृत्य की घोर निंदा करते हैं। आज तक ऐसा कभी नही हुआ यदि कोई आंदोलन कर रहा हो, तो कोई दूसरा संस्था किसी आंदोलन का विरोध किया हो। हमारे आंदोलन का विरोध एसकेएमएस यूनियन द्वारा किया गया, इससे यह प्रतीत होता है कि यह मजदूर यूनियन आदिवासी बेरोजगार युवाओं का घोर विरोधी है। हम बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग कर रहे थे, वो भी खुले मंच से, हमारी मांग से यूनियन के सचिव व अध्यक्ष के पेट में दर्द क्यो हो रहा है? इसका अर्थ यह है कि ये यूनियन आदिवासी समुदाय का विरोधी है। इनके प्रमुख पदाधिकारी पिछले दरवाजे से आर्थिक लेन देन कर एनएमडीसी के साथ मिलीभगत कर अपने गृह राज्य के लोगों को लेबर सप्लाई में लगवाने का काम करते हैं। अब जब हमारे बेरोजगार भाई जागरूक हो कर एनएमडीसी से लेबर सप्लाई में काम की मांग कर रहे तो यूनियन के सचिव को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। लेबर सप्लाई की भर्ती में पारदर्शिता हो जाएगी तो इनका प्रबन्धन से अनावश्यक दबाव खत्म हो जायेगा। लेन-देन करके लेबर सप्लाई में भर्ती भी बंद हो जाएगी, इसी आशंका के कारण ये लोग आंदोलन का विरोध करने रैली निकाली है।
शंकर राव का हुआ पुतला दहन…
आज जनपद सदस्य मुकेश कर्मा ने नेतृत्व में एसकेएमएस के सचिव शंकर राव का पुतला दहन किया गया। मुकेश ने बताया कि शंकर राव द्वारा एनएमडीसी बचेली में चल रहे धरना प्रदर्शन के विरोध में रैली निकाली गई थी और आदिवासियों का विरोध किया गया था। एसकेएमएस द्वारा यह भी अफवाह फैलाया जा रहा है कि उनके दबाव में आकर ही चकक्काजाम खत्म किया गया है, जो सरासर गलत है। शंकर राव शुरू से ही आदिवासियों का विरोध करते आए हैं। सिर्फ अपनी जेब भरने वह लगातार आदिवासियों का शोषण कर रहे हैं। मुकेश ने आगे कहा कि आज सभी युवाओं ने मिलकर शंकर राव का पुतला दहन कर उन्हें आदिवासी विरोधी बताया है।

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