सुकमा (डेस्क) – छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज शनिवार को सुकमा स्थित पुनर्वास केंद्र का अचानक निरीक्षण कर एक अनूठी मिसाल पेश की. उन्होंने न केवल हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवाओं के साथ ज़मीन पर बैठकर चौपाल लगाई, बल्कि उनकी सबसे बड़ी समस्या—मूलभूत दस्तावेज़ों की कमी—को दूर करने के लिए खुद ज़मीन पर उतर आए.
युवाओं के साथ बैठकर सुलझाई दस्तावेजों की समस्या
जब युवाओं ने बताया कि उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ पूरे नहीं हैं, तो उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने तुरंत ज़िला प्रशासन को निर्देश दिए. इतना ही नहीं, उन्होंने स्वयं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकर दस्तावेज़ निर्माण की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया. उनकी उपस्थिति में ही युवाओं के आवेदन कराए गए, और जहां भी तकनीकी दिक्कतें आईं, उन्हें मौके पर ही दूर किया गया.
उपमुख्यमंत्री की सरलता : अधिकारियों और युवाओं दोनों ने उपमुख्यमंत्री की इस सहजता और ज़मीनी जुड़ाव की सराहना की. श्री शर्मा की यह पहल दिखाती है कि सरकार पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए कितनी गंभीर है.
स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य की चिंता
उपमुख्यमंत्री ने युवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी ली और उनके भोजन व अन्य आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए. उन्होंने युवाओं के भविष्य और सामाजिक जीवन को संवारने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की:
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर : युवाओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए केंद्र में ही विशेष मेडिकल कैम्प लगाने का निर्देश दिया गया है.
परिवार से मुलाकात में आसानी : युवाओं के परिवार सदस्यों को पुनर्वास केंद्र में आकर मिलने की पूरी छूट दी गई है. जेल में निरूद्ध परिजनों से मुलाकात की व्यवस्था भी करने को कहा गया है.
सामूहिक विवाह : विवाह की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए सरकार सामूहिक विवाह का आयोजन करेगी.
लोकतंत्र से सीधा जुड़ाव : विधानसभा भ्रमण
श्री शर्मा ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पुनर्वासित युवाओं को विधानसभा सत्र के दौरान रायपुर का भ्रमण कराया जाए. इस पहल का उद्देश्य इन युवाओं को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सरकारी कार्यप्रणाली को करीब से समझाना है, ताकि वे एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में खुद को स्थापित कर सकें.

इस केंद्र में युवाओं को वर्तमान में राज मिस्त्री, कृषि उद्यमी और सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उन्हें पुनर्वास नीति के तहत दीर्घकालिक रोज़गार मिल सके.