जगदलपुर (डेस्क) – 28 अक्टूबर 2025 बीते मंगलवार की सुबह मानवता के जिस प्रयास ने एक नवजात जीवन को बचाने की उम्मीद जगाई थी, वह प्रयास अंततः विफल रहा. जिस मासूम को उसके अपनों ने ही बेरहमी से मौत के मुँह में छोड़ दिया था, वह ज़िंदगी की जंग हार गया.
डिमरापाल मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि चिकित्सकों ने नवजात को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की. लेकिन जन्म के समय से ही अत्यधिक कमजोर होने के कारण, नवजात जीवन को थाम नहीं पाया और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
परित्याग के घिनौने इरादे की कीमत
यह वही नवजात था जिसे अलसुबह लगभग 4:30 बजे, ऑटो मिस्त्री की तत्परता और मानवता ने जिले के परपा थाना क्षेत्र में झाड़ियों से सुरक्षित बाहर निकाला था. जिस समय पूरा शहर गहरी नींद में था, तब इस मिस्त्री ने नवजात की करुण पुकार सुनकर उसे पुलिस और अस्पताल तक पहुँचाया था.
पुलिस ने इस जघन्य कृत्य के लिए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था. चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की दिन-रात की देखभाल के बावजूद, निर्मम परित्याग के कारण मासूम के शरीर में आई कमज़ोरी पर विजय नहीं पाई जा सकी.
नवजात की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ममता को शर्मसार करने वाले इस कृत्य की कीमत उस मासूम जान को चुकानी पड़ी, जिसे दुनिया में आने से पहले ही अकेला छोड़ दिया गया था. ऑटो मिस्त्री की संवेदनशीलता ने इंसानियत को ज़िंदा रखा, पर क्रूरता के आगे ज़िंदगी हार गई.