जगदलपुर (डेस्क) – 28 अक्टूबर 2025 बीते कल मंगलवार की तड़के सुबह लगभग 4:30 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तब एक ऑटो मिस्त्री की मानवता ने एक नवजात जिंदगी को बचा लिया. आधी रात की सुनसान सड़कों पर ऑटो मिस्त्री को शौच के लिए झाड़ियों की ओर जाना पड़ा, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि प्रकृति के उस सन्नाटे में, वे एक नवजात शिशु की करुण पुकार सुनेंगे, जिसे उसके अपनों ने ही मौत के मुँह में छोड़ दिया था. मामला परपा थाना क्षेत्र का है.
करुण की पुकार और मानवता की दौड़
ऑटो मिस्त्री ने जैसे ही झाड़ियों के पास नवजात के रोने की दबी हुई आवाज सुनी, वे भौंचक्के रह गए. तत्काल उन्होंने आगे बढ़कर देखा तो एक कपड़े में लिपटी हुई मासूम जान रो रही थी. किसी अज्ञात, निर्मम व्यक्ति ने उस नवजात को जीवित अवस्था में ही, परित्याग करने के घिनौने उद्देश्य से, झाड़ियों के ऊपर अरक्षित छोड़ दिया था.
यह मार्मिक दृश्य देखकर ऑटो मिस्त्री का हृदय पसीज गया. उन्होंने बिना समय गवाए तुरंत अपने पड़ोसी और सड़क पर दिखीं कुछ स्थानीय महिलाएँ, को बुलाया.
पुलिस बनी सहारा, अस्पताल में उम्मीदें कायम
मानवता के इस संकटकाल में, ऑटो मिस्त्री ने तत्काल थाना परपा पुलिस को मोबाइल से सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची. पुलिस ने मौजूद महिलाओं की मदद से नवजात को कपड़े से उठवाया और बिना एक पल गंवाए उसे डिमरापाल अस्पताल के लिए रवाना किया.
ऑटो मिस्त्री और उसका पड़ोसी भी पुलिस के साथ अस्पताल गए और नवजात को तुरंत उपचार हेतु नर्सरी में उपस्थित डॉक्टर और नर्स को सौंपा गया.
ममता क्यों हुई शर्मसार ?
किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा इस तरह एक जीवित नवजात को परित्याग करना, समाज के माथे पर एक कलंक है. पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ नवजात को जीवित अवस्था में परित्याग करने के इरादे से छोड़ने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है.
फिलहाल, नवजात शिशु अस्पताल में उपचाररत है और सभी लोग उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं. ऑटो मिस्त्री ने अपनी तत्परता और संवेदनशीलता से यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है.