जगदलपुर (सुनील कश्यप) – बस्तर संभाग के हृदयस्थल जगदलपुर में स्थित ऐतिहासिक चंदैया मेमोरियल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च, जिसे स्थानीय लोग श्रद्धा से ‘लाल चर्च’ के नाम से जानते हैं, में आयोजित वार्षिक शांति महोत्सव का रविवार को भव्य समापन हो गया. 09 अक्टूबर से शुरू हुए इस चार दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन में उत्साह, प्रेम और पवित्र आत्मा की सामर्थ्य का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें बस्तर संभाग के हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया और आशीष प्राप्त की.
प्रभु यीशु के सुसमाचार की गूंज
शांति महोत्सव में मुख्य प्रचारक के रूप में मुंबई से आए प्रेरित विल्सन फर्नाडीज ने प्रभु यीशु मसीह के प्रेम, क्षमा और स्वभाव पर ओजस्वी वचन साझा किए. उनके संदेश का मुख्य केंद्र बिंदु लुका रचित सुसमाचार 10 अध्याय के 2 पद पर रहा: “पके खेत बहुत हैं परंतु मजदूर थोड़े हैं, इसीलिए खेत के स्वामी से विनती करो कि वह अपने खेत काटने को मजदूर भेज दें.” इस शक्तिशाली संदेश ने उपस्थित जनसमूह को प्रभु के कार्यों के लिए समर्पित होने हेतु प्रेरित किया.
बारिश भी नही रोक पाई आस्था का सैलाब
महोत्सव के दौरान, 11 अक्टूबर को आराधना के समय जोरदार बारिश हुई, लेकिन यह आस्था के उत्साह को कम नहीं कर पाई. भीगते हुए भी लोगों ने प्रभु के नाम की महिमा की, जिसे आयोजन समिति ने “आशीष की बारिश” बताया. संचालन समिति के अध्यक्ष प्रवीण लाल और प्रचार समिति की अध्यक्षा अल्पना जॉन ने बताया कि यह आयोजन हर साल नई ऊर्जा भरता है. उन्होंने कहा, “कलीसिया के बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए इसे एक बड़ा माध्यम बनाया है, जो न केवल चर्च समुदाय के लिए, बल्कि पूरे जगदलपुर शहर के लिए शांति, विश्वास और सकारात्मकता का संदेश लेकर आया है.”
इस विशाल सभा में विश्वासी, लीडर, आराधक, मिशनरी, पास्टर्स और बिशप्स सहित बस्तर संभाग के कोने-कोने से आए हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया और आत्मिक रूप से आशीषित हुए.
सफलता के पीछे एकजुटता का प्रयास
चारों ही दिन इस महोत्सव को शांतिपूर्ण तरीके से सफल बनाने में संचालन समिति, प्रचार समिति, चर्च के सभी सदस्यों के साथ-साथ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस सामूहिक प्रयास ने बस्तर में एक सफल और सुचारू धार्मिक आयोजन का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है. इस वार्षिक आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लाल चर्च, जगदलपुर सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि बस्तर में आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का एक बड़ा केंद्र है.