जगदलपुर (डेस्क) – मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में शहीद हुए बस्तर के सपूत, राइफलमैन रंजीत कश्यप, को अंतिम विदाई देने के लिए आज सोमवार को स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. यह खबर सुनकर हर आँख नम थी, क्योंकि जिस रंजीत को कुछ दिन पहले ही हँसी-खुशी से उनके परिवार ने ड्यूटी पर वापस भेजा था, वह अब तिरंगे में लिपटा हुआ घर लौटा. उनकी शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की रक्षा के लिए हमारे जवान अपनी जान की परवाह नहीं करते.
पूरे सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
जैसे ही शहीद रंजीत का पार्थिव शरीर जगदलपुर एयरपोर्ट पर पहुँचा, उनके परिवार, दोस्तों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. वहाँ से उनके शव को एक बाइक रैली के साथ उनके पैतृक गाँव बालेंगा ले जाया गया. रास्ते भर ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद रंजीत अमर रहें’ के नारे गूँजते रहे. हर तरफ लहराते तिरंगे और नम आँखें, उनकी बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान का सम्मान कर रही थीं. यह एक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण था. इस हमले में रंजीत के साथ असम राइफल्स के एक और जवान भी शहीद हुए थे.

उनके सम्मान में, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित किए, और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. यह एक ऐसा क्षण था जब हर कोई गर्व से सिर झुकाए हुए था.
एक परिवार का दुख और पूरे गांव का गर्व
शहीद रंजीत के घर पर शोक व्यक्त करने के लिए वन मंत्री केदार कश्यप और बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल भी पहुँचे. रंजीत की तीन छोटी बेटियाँ शायद यह समझ ही नहीं पा रही थीं कि उनके घर पर क्या हुआ है. उनकी पत्नी, इस दुख से टूट चुकी थीं, कभी अपने पति को देखतीं, तो कभी अपनी मासूम बच्चियों को. यह सोचकर उनका दिल बैठा जा रहा था कि अब वह उन्हें कैसे समझाएँगी कि उनके पिता कभी वापस नहीं आएँगे.
रंजीत अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा थे. जिस माँ ने हँसते हुए अपने बेटे को विदा किया था, आज वह उसे तिरंगे में लिपटा हुआ देखकर टूट चुकी थी. जिस घर में कभी रंजीत की हँसी गूँजती थी, आज वहाँ सिर्फ खामोशी और मातम पसरा हुआ था. हालाँकि, इस दुख की घड़ी में भी, उनके परिवार और गाँव के लोगों को रंजीत के बलिदान पर गर्व था. उनकी शहादत ने यह साबित कर दिया कि बस्तर के जवान भी देश की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहते हैं.

शहीद रंजीत कश्यप का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया. उनकी बहादुरी और बलिदान को उनके परिवार और पूरा गाँव हमेशा याद रखेगा.