सुकमा (डेस्क) – जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. जिले के जगरगुंडा थाना क्षेत्र के सिलगेर गांव में आज बुधवार की देर शाम एक शिक्षा दूत माओवादी हिंसा का शिकार बन गया है. लगभग 30 वर्षीय लक्ष्मण बारसे मण्डीमरका में शिक्षा दूत के पद पर पदस्थ थे और सिलगेर में निवास करते थे. वह मूल रूप से बीजापुर जिले के बासागुड़ा थाना अंतर्गत पेगड़ापल्ली गांव के रहने वाले थे.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज देर शाम करीब 7:30 बजे माओवादी लक्ष्मण के घर पहुंचे और धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया. इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई. हमलावरों ने बीच बचाव करने आए उनके परिजनों के साथ भी मारपीट की, जिससे गांव में अफरा – तफरी और दहशत का माहौल बन गया.

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि माओवादी लंबे समय से लक्ष्मण को शिक्षा सेवा छोड़ने की धमकी और समझाइश दे रहे थे. इसके बावजूद लक्ष्मण ने बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे. शिक्षा के प्रति उनकी यही निष्ठा अंततः उनके लिए जानलेवा साबित हुई.

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही जगरगुंडा थाना से टीम मौके पर रवाना हुई और मामले की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. साथ ही माओवादियों की तलाश के लिए अभियान तेज कर दिया गया है.

लक्ष्मण बारसे की नृशंस हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. वे न सिर्फ एक शिक्षक थे, बल्कि ग्रामीण बच्चों के लिए उम्मीद और बदलाव का प्रतीक भी थे. उनकी मौत ने इलाके में शिक्षा की रोशनी को धुंधला करने का प्रयास किया है. इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा दूत और शिक्षक लगातार जोखिम उठाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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