जगदलपुर (डेस्क) – आफत बनकर बस्तर में बरसी बारिश ने पिछले 94 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है. और इस साल रिकॉर्ड तोड़ 217 मिली मीटर बारिश हुई है. जिसने बस्तर में भयंकर तबाही मचाई है. बस्तर में बारिश से 5 लोगों की मौत हुई है. 7 बड़े बड़े पूल पुलिया टूट गए है. 448 लोगों को राहत शिविर केंद्रों में रखा गया है. 6 लोगों का हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया. 160 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. वहीं 11 ग्राम बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

आफत बनकर बरसी बारिश ने बस्तर में मचाये तबाही को दिखाने के लिए बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल की टीम कोलेंग मार्ग पर स्तिथ टूटे पूल पर पहुंची. और देखा कि कांगेर नाले से बाढ़ अपने साथ सैकड़ो पेड़ो को लेकर पूल पहुँची. जिससे पूल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. पूल पर पेड़ो का ढेर लग गया है. वहीं मार्ग पर करीब 20 – 30 मीटर सड़क व पूल का हिस्सा बह गया है. पूल के बहने से ग्राम कोलेंग व आसपास के गांव का जिला मुख्यालय से सम्पर्क टूट गया हैं. जिससे हजारों लोग प्रभावित हो गए है. दरअसल कोलेंग लंबे समय से माओवाद प्रभावित इलाका रहा है. कोलेंग के आगे चांदामेटा में माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर हुआ करता था. माओवादियों के कब्जे से इलाके को मुक्त करने के लिए सरकार ने काफी मशक्कत करते हुए सबसे महत्वपूर्ण इस पूल का निर्माण करवाया था. पूल निर्माण के बाद ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा हुई. लेकिन आफत बनकर बीते कल 26 अगस्त को बरसी बारिश ने एक बार कोलेंग के निवासियों को जिला मुख्यालय से दूर कर दिया है. आवागमन बाधित हुई है. हालांकि जल स्तर कम होने के कारण और अधिक पूल क्षतिग्रस्त होने की संभावना कम है. लेकिन बहे हिस्से का निर्माण दुबारा करवाने में कम से कम करीब 6 महीने से अधिक का समय लग सकता है. ग्रामीणों ने बताया कि भयंकर बारिश और बाढ़ को उन्होंने अपने जीवन मे पहली बार देखा है. इससे पहले इस तरह का बाढ़ और बारिश कभी नहीं हुई थी. भयंकर बारिश से पूल क्षतिग्रस्त हुई है.

इधर पूरे बस्तर संभाग में बारिश से हाहाकार मचा है. बस्तर की प्रमुख इंद्रावती नदी, शबरी नदी, संकनी डंकनी नदी के साथ ही सभी सहायक नदियां भी उफान पर है. बस्तर के अलावा दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिले में भी पूल – पुलिया व सड़क टूट गई है. सभी जिलों में राहत शिविर केंद्र बनाए गए हैं. बाढ़ प्रभावितों का रेक्सयू लगातार जारी है. कई गांव टापू में तब्दील हो गए है. बारिश कम होने के कारण अब जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावितों तक पहुंच रही है. और आवश्यक कार्रवाई कर रही है.