दंतेवाड़ा (डेस्क) – बस्तर संभाग में चल रहे पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन तथा लोन वर्राटू (घर वापस आईये) अभियान का असर लगातार दिख रहा है. इसी कड़ी में आज बुधवार को दंतेवाड़ा में कुल 21 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इनमें 25 लाख 50 हजार रुपए के 13 इनामी नक्सली भी शामिल हैं.
सबसे बड़ा नाम केये उर्फ केशा लेकाम का है, जिस पर 8 लाख का इनाम था और जो वर्ष 2025 में परसबेड़ा जंगल में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में शामिल रहा है. वहीं, महिला माओवादी सोमे उर्फ जमली कुहड़ाम (इनामी 1 लाख) और हिड़मे उर्फ विज्जो ओयाम (इनामी 1 लाख) ने भी आत्मसमर्पण किया है.
अन्य नक्सली संगठन में विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय थे. ये कैडर नक्सली बंद के दौरान सड़क काटना, पेड़ गिराना, बैनर-पोस्टर चिपकाना और ग्रामीणों को भयभीत करने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे है.
आत्मसमर्पण पुलिस अधीक्षक कार्यालय दंतेवाड़ा में किया गया. इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी., पुलिस उप महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय समेत सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल के अधिकारी मौजूद थे.
आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत 50 हजार रुपए की तत्काल सहायता राशि दी जाएगी. इसके साथ ही उन्हें सुविधाएं भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
पिछले 18 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में 390 से अधिक माओवादी, जिनमें 99 इनामी शामिल हैं, मुख्यधारा में लौट चुके हैं. वहीं लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 1042 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं.
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि माओवादी हिंसा और शोषण से तंग आ चुके हैं और अब लोकतंत्र व शांति पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. अधिकारियों ने बाकी माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर समाज और परिवार की खातिर पुनर्वास का मार्ग अपनाने की अपील की है.