सुकमा (डेस्क) – नक्सल प्रभावित जगरगुंडा क्षेत्र की हालत एक बार फिर सवालों के घेरे में है. विकास के वादे और योजनाएं जहां कागज़ों पर द्रुत गति से दौड़ रही हैं, वहीं जमीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है. इसका जीता – जागता उदाहरण है जगरगुंडा के बीच बस्ती से होकर गुजरने वाली वह अधूरी सड़क, जो इन दिनों बारिश के चलते कीचड़ में तब्दील हो गई है.

यह वही सड़क है जो सुकमा से जगरगुंडा होते हुए दंतेवाड़ा तक पहुंचती है. हालांकि जगरगुंडा से बीजापुर का मार्ग पूर्ण हो चुका है, लेकिन जगरगुंडा से दंतेवाड़ा की ओर जाने वाला हिस्सा खासकर मुख्य चौराहे से थाना परिसर तक का मार्ग अब तक अधूरा पड़ा है. इस अधूरे निर्माण ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं.

वीडियो में दिखी सच्चाई

स्थानीय ग्रामीणों द्वारा रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे गांव के मुख्य मार्ग में पानी और कीचड़ का अंबार लगा है./पैदल चलना तक दूभर हो गया है। दोपहिया वाहन फिसलते हैं, लोग गिरते हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी एक संघर्ष में बदल चुकी है. गांव की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इसी कीचड़ से होकर स्कूल, अस्पताल या काम पर जाने को मजबूर हैं.

हम सड़क नही, संकट पार कर रहे है

गांव के निवासी रामाराव ने कहा कि सरकार कहती है विकास हो रहा है, लेकिन हमारे गांव में तो रास्ता ही नहीं है. यह सड़क नहीं, हमारे लिए रोज़ का संकट है. वहीं, एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि बारिश के दिनों में दवा लेने जाना तक मुश्किल हो जाता है, कई बार लोग कीचड़ में फिसलकर घायल हो चुके हैं.

ठेकेदार की लापरवाही और प्रशासन की चुप्पी

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है. महीनों पहले खुदाई कर अधूरा छोड़ दिया गया. ना मिट्टी समतल की गई, ना नाली निकासी की व्यवस्था की गई. अब बारिश ने सड़क को दलदल बना दिया है। अधिकारियों को कई बार जानकारी देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

जनप्रतिनिधियों से उम्मीदें टूटती दिख रही है

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्दी ही सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे और जिम्मेदारों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. हम वोट तो दे देते हैं, पर उसके बाद कोई हमारी सुध नहीं लेता, वहीं स्थानीय युवक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम वोट तो दे देते हैं, पर उसके बाद कोई हमारी सुध नहीं लेता है.

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