सुकमा (डेस्क) – नक्सल प्रभावित पोटकपल्ली गांव में खुले सोखता टैंक के गड्ढे में गिरकर तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है. यह वह मामला है जिसे बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल की टीम ने प्रमुखता से उठाया और प्रदेश युवा कांग्रेस महासचिव दुर्गेश राय ने जनप्रतिनिधि की भूमिका निभाते हुए इसे सरकार और प्रशासन तक पहुंचाया.

घटना के तीन सप्ताह बीतने के बावजूद जब कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची थी, तब दुर्गेश राय ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और सोशल मीडिया व स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार तंत्र को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव को पत्र के माध्यम से मामले की जानकारी दी, जिसके बाद कलेक्टर ने तत्काल तहसीलदार को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए.

प्रशासन की ओर से शनिवार को तहसीलदार और ग्राम सचिव ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें राशन सामग्री और तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की. इसके साथ ही नियमानुसार पीड़ित परिवार के लिए आरबीसी 6 – 4 के तहत आर्थिक सहायता अनुदान राशि का प्रकरण दर्ज किया गया है. इसके अंतर्गत प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के लिए पीड़ित परिवार को शासन के द्वारा 4 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाती है. प्रशासन की यह प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से जनदबाव और मीडिया की भूमिका का परिणाम मानी जा रही है.

हालांकि, गांव में अब भी नाराजगी का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सुरक्षित तरीके से किया गया होता तो मासूम की जान नहीं जाती. परिजनों ने न्यायिक जांच और स्थायी मुआवजा की मांग की है.

दुर्गेश राय ने प्रशासन से सभी अधूरे और असुरक्षित निर्माण कार्यों की समीक्षा की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं. उनका यह प्रयास सिस्टम की नींद तोड़ने और जनहित को प्राथमिकता दिलाने का सार्थक उदाहरण बन गया है.

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