सुकमा (डेस्क) – जिले में अंधविश्वास ने एक बार फिर दो जिंदगियों की बलि ले ली है. जिला मुख्यालय से लगे सबरी नदी में डूबने से एक 17 वर्षीय युवती और झाड़ – फूंक करने वाले एक बैगा की दर्दनाक मौत हो गई.

मिली जानकारी के अनुसार सुकमा के एक ग्रामीण परिवार की 17 वर्षीय बेटी पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थी. परिजनों ने स्थानीय बैगा से सलाह लेकर नदी में ‘बड्डे’ यानी विशेष पूजा करने का निर्णय लिया. शनिवार को पूरा परिवार बैगा के साथ सबरी नदी के किनारे पूजा के लिए गया.

मान्यता के अनुसार पूजा के बाद बीमार युवती को नदी में डुबकी लगानी थी, जिससे उसका रोग समाप्त हो जाए. युवती जैसे ही नदी में उतरी, तेज बहाव में बहने लगी. उसे बचाने के लिए साथ गए बैगा ने नदी में छलांग लगा दी, लेकिन वह भी बह गया.

घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी. राहत कार्य में जुटी टीम ने युवती का शव बरामद कर लिया है, जबकि बैगा की तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीम सबरी नदी में सर्च ऑपरेशन चला रही है.

यह घटना आदिवासी अंचल में अब भी व्याप्त अंधविश्वास की गंभीरता को उजागर करती है, जहाँ बीमारी के इलाज के लिए आज भी झाड़ – फूंक और टोना – टोटके जैसे उपायों पर भरोसा किया जाता है. प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और वैज्ञानिक उपचार अपनाने की अपील की है.

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