कांकेर (डेस्क) – आदिवासी कार्यकर्ता एवं किसान नेता संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर बस्तर क्षेत्र में आयोजित होने वाले किसान पंचायतों के आदिवासी किसान समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए आने वाले किसान पंचायत में जनता को आमंत्रित किया है.
किसान नेता ने आगे कहा है कि पंचायतों का आयोजन पीड़ित एवं दुखी समाज द्वारा किया जाता है ना की पूंजीपतियों एवं शोषणकारी ताकतों द्वारा. पूंजीपति एवं सरकारी साजिश की कीमत बस्तर की आदिवासी जनता पिछड़ेपन एवं अपने ही समाज के बेकसूर किसान भाइयों की जान देकर चुका रही है. बस्तर क्षेत्र के आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों की इन सभी मामलों में चुप्पी और कमीशनखोरी में मिलीभगत ने बस्तर के आदिवासी किसान समाज को चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सिर्फ वोट देने तक सीमित कर दिया है. आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों का उनके अपने ही राजनीतिक पार्टी में मूल्य सोने के अंडे देने वाली मुर्गी से ज्यादा नहीं होगा. पांचवी अनुसूची एवं पेसा कानून लगे बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों के कल्याण के लिए आने वाले सरकारी पैसों का चुने गए जनप्रतिनिधियों एवं सरकारी तंत्र द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचार का स्तर पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश सहित कई अफ्रीकी देशों के स्तर का है. महान है केंद्र की वह जांच एजेंसियां जिन्हें सिर्फ सत्ताधारी दल के राजनीतिक विरोधियों के घरों में छापा मारने की ट्रेनिंग मिली है.
जल, जंगल और जमीन को बचाने की संवैधानिक लड़ाई में भारतीय किसान यूनियन बहुजन समाज के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा है. संवैधानिक लड़ाई की इसी कड़ी के अंतर्गत दिनांक 20 मार्च 2025 (दिन गुरुवार) को बीजापुर जिले के कुटरु में किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा. इस पंचायत में बस्तर सहित मणिपुर से जुड़े हुए आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों सहित खेती – बाड़ी, आदिवासी किसान भाइयों के लिए कृषि के ढांचागत सुधारों एवं मिर्ची तोड़ने के लिए बस्तर क्षेत्र से मानव श्रम का दूसरे प्रदेशों में पलायन पर चर्चा की जाएगी. भारतीय किसान यूनियन समाज के सभी वर्गों से इस पंचायत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करता है.