सुनील कश्यप, बस्तर- हर साल की भांति क्रिसमस और नए साल के उत्सव के बाद मसीह समाज के सदस्य धन्यवादी पर्व मनाते हैं. और बस्तर में इन दिनों धन्यवादी पर्व की शुरुआत हो गई है. विभिन्न चर्चों में धन्यवादी का पर्व अलग अलग दिनों में आयोजित किया जा रहा है. इसी कड़ी में बस्तर जिले के एक अंदरूनी इलाके में धन्यवादी पर्व मनाया गया. जिसमें विभिन्न चढ़ाए हुए सामग्रियों की बोली की प्रक्रिया सम्पन्न की गई. सबसे रोचक बात यह थी इस धन्यवादी में 2 मुर्गे की जोड़ी की अंतिम बोली 15 हजार पर समाप्त हुई.

रेव्ह. वीरेंद्र नाथ ने जानकारी देते हुए बताया कि बाइबिल के सबसे पहले पाठ उत्पत्ति में परमेश्वर के समक्ष कैन और हाबिल ने भेंट चढ़ाया था. जिसमें हाबिल ने सर्वोत्तम दिया था. वहीं कैन ने कुछ भी भेंट चढ़ाया था. जिसके बाद परमेश्वर ने हाबिल की भेंट ग्रहण की. लेकिन कैन की भेंट ग्रहण नहीं हुई. जिसके बाद पुराने नियम के अंतिम पाठ मलाकी में भेंट और दशमांश के विषय में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है. जिसके कारण प्रभु के लोग निरन्तर धन्यवाद स्वरूप परमेश्वर को भेंट अर्पण करते हैं. और साल भर में एक बार धन्यवादी पर्व मनाया जाता है. जहां मसीही समाज के सदस्य अपने खेत, बाड़ी में लगाये फसल, घरों में पाले गए विभिन्न बकरे, मुर्गे, गाय, बैल और अन्य धन्यवादी के दिन वेदी में अर्पण करते हैं. जिसके बाद सभी सामग्रियों की एक एक करके बोली लगाई जाती है. और बढ़ चढ़कर लोग बोली की हिस्सा बनकर सहभागी होते हैं. इसी बीच अंतिम बोली 2 छोटे बड़े मुर्गे की लगाई गई. जिसकी शुरुआत 1 हजार से हुई जो धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते 15 हजार पर सम्पन्न हुई. इस तरह हर साल धन्यवादी पर्व विभिन्न चर्चों में मनाया जाता है.

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